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Rajasthan Education Update: राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा ग्रेड-3 शिक्षक भर्ती में संशोधित मेरिट के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।

Rajasthan Education Update: राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षक ग्रेड-3 लेवल-2 (हिंदी) भर्ती मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आपको बता दें कि संशोधित परिणाम में ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर नियमानुसार पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने कहा कि अगर संशोधित मेरिट सूची में याचिकाकर्ता अपने वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक अंक प्राप्त करते हैं और रिक्त पद उपलब्ध हैं, तो उन्हें नियुक्ति दी जाए।

संशोधित मेरिट सूची पर फैसला

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि भर्ती परीक्षा की उत्तर कुंजी में त्रुटियों के कारण उन्हें पहले कम अंक मिले थे। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनके अंक बढ़ गए, लेकिन अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। वहीं सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मामला पहले दिए गए यासमीन बी बनाम राज्य सरकार फैसले से मिलता-जुलता है। राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड भी इसका प्रभावी विरोध नहीं कर सके। इसके बाद कोर्ट ने उसी निर्णय के अनुरूप याचिका स्वीकार कर ली। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने पर वरिष्ठता और वेतन निर्धारण का काल्पनिक (नोटेशनल) लाभ मिलेगा, लेकिन पूर्व अवधि का वेतन एरियर नहीं दिया जाएगा। साथ ही, केवल संशोधित उत्तर कुंजी के आधार पर पहले से कार्यरत अभ्यर्थियों की सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। हाईकोर्ट ने भर्ती परीक्षाओं में होने वाली त्रुटियों पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने संबंधी अपने पूर्व निर्देश भी दोहराए।

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याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि भती परीक्षा की उत्तर कुंजी में त्रुटियों के कारण उन्हें पहले कम अंक मिले थे। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनके अंक बढ़ गए, लेकिन अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मामला पहले दिए गए यासमीन बी बनाम राज्य सरकार फैसले से मिलता-जुलता है। राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड भी इसका प्रभावी विरोध नहीं कर सके। इसके बाद कोर्ट ने उसी निर्णय के अनुरूप याचिका स्वीकार कर ली।

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