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Berry Chutney: आयुर्वेदिक चिकित्सक मनाते हैं कि बेर में फाइबर, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और आवश्यक खनिज के साथ साथ कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं।

Berry Chutney: सर्दियों और बसंत के मौसम में जब देसी बेर आसानी से मिलने लगते हैं, तब बेर की खट्टी-मीठी चटनी लोगों की पहली पसंद बन जाती है। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के गांवों में यह चटनी वर्षों से बनाई और खाई जा रही है। यहां बेर को कच्चा खाने के साथ-साथ सुखाकर या चटनी बनाकर इस्तेमाल करने की परंपरा है। मसालों के साथ तैयार की गई यह चटनी रोटी और चावल के साथ खाने का स्वाद बढ़ा देती है, इसलिए इसे पारंपरिक भोजन का जरूरी हिस्सा माना जाता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सक मनाते हैं कि बेर में फाइबर, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और आवश्यक खनिज के साथ साथ कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। विंध्य क्षेत्र में मान्यता है कि नियमित बेर या बेर की चटनी खाने से पाचन तंत्र की समस्याएं जैसे कब्ज, गैस आदि दूर हो जाती हैं। 

कैसे बनाएं बेर की चटनी?

बेर की चटनी खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है बनाने में उतनी ही आसान है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले बेर को अच्छी तरह से धो लें। फिर उसे साफ पानी में उबालने के लिए रख दें। जब बेर नरम हो जाए उसे उतार लें और ठंडा कर लें। अब इसमें मसाले को मिलाकर कूटकर या फिर पीसकर चटनी बना ले। विंध्य क्षेत्र में पारंपरिक तौर पर इसमें गुड़, लाल मिर्च पाउडर, नमक, जीरा और थोड़ी सी हींग मिलाई जाती है हालांकि आप इसे अपने स्वाद अनुसार बदल सकते हैं। इसमें आप सौंफ और धनिया पाउडर भी डाल सकते हैं। ऐसी चीजें डालने से चटनी का स्वाद और भी बढ़ जाता है।

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बेर की चटनी खाने से होते हैं कई लाभ

  1. बेर की खट्टी मीठी चटनी पाचन शक्ति को मजबूत बनाती है और पेट को भी साफ रखती है।
  2. इसे नियमित खाने से गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी नहीं आती।
  3. इससे खाने से भूख भी बढ़ती है। 
  4. शरीर को पूरे दिन ऊर्जावान बनाने के लिए भी यह चटनी बेहद लाभकारी है। 
  5. जिन लोगों को खून की कमी हो वो भी इस चटनी का सेवन कर सकते हैं इससे खून बढ़ता है। 
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