Golden Hour Treatment: हार्ट अटैक के मरीजों को गोल्डन आवर में इलाज उपलब्ध करवाने के लिए अजमेर एवं कोटा स्थित सीएचसी और इससे बड़े अस्पतालों में दिल से (डेडिकेटेड इंटरवेंशन एंड लाइफ सेविंग स्टेमी इमरजेंसी) योजना का पायलट प्रोजेक्ट लागू किया है।इसके तहत चयनित सीएचसी पर दिल के मरीज को ईसीजी जांच और दवाओं के जरिए इलाज दिया जाएगा, फिर बड़े सेन्टर पर रेफर करके थ्रोम्बोलाइसिस विधि से इलाज होगा।
अजमेर और कोटा में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
थ्रोम्बोलाइसिस में एक एंजाइम के जरिए खून में मौजूद थक्के को गलाया जाता है, जिससे खून पतला होने लगता है और आसानी से धमनियों में संचरण कर पाता है। अजमेर में 23 और कोटा में 19 योजना में शामिल है। पायलट प्रोजेक्ट के बाद योजना जयपुर समेत प्रदेशभर में लागू की जाएगी। दिल से संबंधित बीमारियों के इलाज की सुविधा वाले अस्पतालों से जोड़ा गया है। हब एंड स्पोक मॉडल के माध्यम से मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर प्राथमिक उपचार मिलेगा। जरूरत पड़ने पर हायर सेन्टर पर रेफर किया जाएगा। गोल्डन आवर के भीतर उपचार उपलब्ध कराने का उद्देश्य है, जिससे मरीज को बचाया जा सके।
हार्ट अटैक पर तेजी से होगी कार्रवाई
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इस योजना को जयपुर समेत पूरे राजस्थान में लागू किया जाएगा। योजना का मुख्य उद्देश्य हार्ट अटैक के मरीजों को गोल्डन आवर के भीतर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके और अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।










