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Jodhpur News: यूजीसी के छात्रों को अब सिलेबस में हिंदू धर्म और ग्रंथों के बारे में पढ़ना होगा। यहां तक कि छात्रों को पंचाग से मुहूर्त निकलने भी सिखाया जाएगा। विश्व विद्यालय अनुदान आयोग ने यह फैसला किया है। चलिए बताते हैं क्या है पूरी खबर।

Jodhpur News: यूजीसी ने अपने एक फैसले से सभी को हैरान कर दिया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यूजीसी के सिलेबस में बड़ा बदलाव करते हुए वैदिक गणित और ब्रह्मा-विष्णु-शिव के बारे में पढ़ाई को शामिल किया है। भारत की परंपरा और त्रेता काल के इतिहास को समाज से जोड़ने के लिए छात्रों को यह विषय पढ़ने का फैसला किया है।

यूजीसी ने भारत के मूल प्राचीन गणित की तरफ वापसी कर स्नातक स्तर पर गणित पाठ्यक्रम में वैदिक गणित, बीज गणित, नारद पुराण के बुनियादी अंकगणित व ज्यामिति अवधारणाओं व तकनीकों, खगोल विज्ञान और काल गणना के साथ ही पंचांग गणना व मुहूर्त की गणनाओं को भी शामिल किया है। जिससे अब गणित केवल सूत्र-आधारित विषय न रहकर सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध और रोचक विषय बन पाएगा।

इसमें काल गणना (पारंपरिक समय गणना): भारतीय विद्वानों द्वारा सूर्य, चंद्र, नक्षत्र और पृथ्वी के गति का उपयोग कर समय गणना की विधियां सिखाई जाएंगी। पंचांग और मुहूर्त का निर्धारण भी शामिल किया गया है। घटी और विघटी जैसी वैदिक समय इकाइयों की तुलना आधुनिक समय प्रणालियों जैसे ग्रीनविच मीन टाइम और भारतीय मानक समय से की जाएगी।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में छात्रों को भारतीय बीजगणित का इतिहास भी पढ़ाया जाएगा, जिसमें पारंपरिक वैदिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इसमें शुल्ब सूत्र और सूत्र आधारित अंकगणित कैसे प्राचीन गणितीय विधियों में शामिल किया वह है, इसका भी जिक्र है। 

यूजीसी द्वारा वैदिक गणित में प्रयुक्त प्राचीन भारतीय गणितीय पद्धतियों को यूजी पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव दूरगामी एवं प्रशंसनीय है। स्टूडेंट्स को प्राचीन भारतीय गणितीय पद्धतियों का ज्ञान प्राप्त होगा और दैनिक जीवन में व्यावहारिक रूप से गणित का उपयोग समझ सकेंगे। डॉ. रवि गुप्ता, संयोजक, गणित, वीएमओयु, कोटा।

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