Rajasthan IPS Officer: भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते एपीओ किए गए आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय से जुड़ी जांच फाइल अब राज्य सरकार के पास पहुंच गई है। राजस्थान में यह पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें प्रोबेशन अवधि के दौरान किसी आईपीएस अधिकारी पर भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोपों की जांच हुई है। मामले में शिकायतें मिलने के बाद 8 अप्रैल 2026 को माधव उपाध्याय को एपीओ किया गया था।
आपको बताते चलें कि यह मामला भीलवाड़ा के कोटड़ी इलाके में गारनेट के अवैध खनन से जुड़ा हुआ है। सरकार ने प्रोबेशन पर आईपीएस माधव उपाध्याय को 24 अगस्त 2025 को सहायक पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा सदर लगाया था। माधव की अजय पांचाल, नंद सिंह, नारायण गुर्जर, कालू गुर्जर और सौरभ काष्ट से जानकारी हुई। अजय पांचाल ने अवैध खनन करने वालों से वसूली करना शुरू किया। पैसा नहीं देने वालों पर वह माधव से कह कर कार्रवाई करवाता और धमकाता था। इसके बाद अवैध खनन माफिया पैसे देने लगे।
हर माह 50 हजार रुपए की वसूली
अजय पांचाल अवैध खनन की प्रत्येक मशीन से हर माह 50 हजार रुपए की वसूली करता था। इसमें आईपीएस माधव उपाध्याय का हिस्सा भी तय था। यह पैसा अलग-अलग जरिए से भीलवाड़ा निवासी सौरभ काष्ट के पास पहुंचता था। भीलवाड़ा के तत्कालीन एसपी धर्मेन्द्र के पास खनन माफिया से पैसा लेने की शिकायत पहुंची। जिसके बाद टीम बनाई गई और जांच शुूरू की गई। जांच के दौरान पुलिस टीम ने सबसे पहले अजय पांचाल पीए (विधायक गोपीचंद मीणा) को पकड़ा।
IPS माधव उपाध्याय पर भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि
पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह खनन माफियाओं से पैसा लेता है। इसके बाद पुलिस ने उससे कुछ पैसा भी रिकवर किया। अजय की सूचना के बाद पुलिस ने नंद सिंह, नारायण गुर्जर, कालू गुर्जर को पकड़ा। इन सभी से हुई पूछताछ में भीलवाड़ा निवासी सौरभ काष्ट का नाम आया। वहीं सौरभ ने बताया कि वह आईपीएस माधव के लिए ही काम करता था। एसपी जीआरपी नरेन्द्र सिंह की जांच के दौरान सौरभ और माधव के मोबाइल की चैट मिले। चैट में पैसा पहुंचने, रिसीव होने, कौन देने आएगा, कहां देगा और किस बात का पैसा आ रहा है उस का जिक्र सामने आया है। जांच टीम ने चैट के आधार पर इस की पुष्टि की तो बात सही मिली। यही नहीं पैसा जहां से उठाया, जिस बात के लिए गया उस की भी पुष्टि की गई है। दो बार हुई जांच में यह साबित हो गया कि लगभग 24 लाख रुपए का लेनदेन हुआ है।
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फिलहाल मामले की फाइल सरकार के पास पहुंच चुकी है और आगे की कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय जांच और सरकार के आधिकारिक फैसले के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।








