Rajasthan Anganwadi: राजस्थान में जर्जर भवनों और किराए के कमरों में चल रही आंगनबाड़ियों का कायाकल्प करने के लिए सरकार ने कॉरपोरेट घरानों को साथ जोड़ने की पहल की है। इसके तहत अब आंगनबाड़ी केंद्रों को 'स्मार्ट प्ले स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी की अध्यक्षता में सीएसआर भागीदारी कार्यशाला आयोजित हुई। निदेशक आईसीडीएस वासुदेव मालावत के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 के तहत कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड जुटाना रहा। नई व्यवस्था में पारंपरिक निर्माण के बजाय लाइट गेज स्टील फ्रेम (एलजीएसएफ) प्री-फैब्रिकेटेड और कंटेनर आधारित आंगनबाड़ी मॉडल अपनाया जाएगा। इसके तहत पोषण वाटिका का निर्माण होगा। सीएसआर फंडिंग के लिए पंखुडी पोर्टल से कंपनियों को जोड़ा जाएगा।
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र ही स्वस्थ और सशक्त राजस्थान की नींव हैं। लक्ष्य सीएसआर सहयोग से जर्जर और किराए के भवनों में चल रहे केंद्रों को अपग्रेड करना है। उन्होंने गुजरात के मॉडल का जिक्र करते हुए बताया कि उसी तर्ज पर राजस्थान के शहरी और अर्ध-शहरी औद्योगिक क्षेत्रों में यह प्रयोग किया जाएगा।
प्रदेश में संचालित लगभग 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 14,772 केंद्र संकटग्रस्त स्थिति में हैं। इनमें 3,284 केंद्र जर्जर या क्षतिग्रस्त भवनों में संचालित हो रहे हैं, जबकि 11,488 केंद्र किराए अथवा अस्थायी परिसरों में चल रहे हैं। बच्चों को बेहतर पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग इन केंद्रों के सुदृढ़ीकरण पर जोर दे रहा है। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि बच्चों की मजबूत नींव ही उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार है। इसी दिशा में आयोजित कार्यशाला में विप्रो, टाटा स्टील, अडाणी ग्रुप, वेदांता, वंडर ग्रुप, श्री सीमेंट, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई, एनपीसीआईएल, हिंदुस्तान जिंक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और डेल सहित कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा अपने अनुभव साझा किए।






