Kota Gharial Century: कोटा शहर के चंबल नदी किनारे बसे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कई सालों से जिन इलाकों में लोग डर और शंका के बीच रह रहे थे, अब वहां स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू होने जा रहा है। चंबल नदी के किनारे करीब 730 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बस्तियों में रहने वाले लगभग 7.30 लाख लोग अब घड़ियाल अभयारण्य के दायरे में नहीं रहेंगे। सरकार की नई योजना के तहत चंबल नदी के किनारे बसे करीब 40 हजार मकानों की पहचान की गई है।
लोगों को मिलेगी सड़क, पानी और बिजली की सुविधाएं
इन मकानों के लिए जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी और साफ तौर पर सीमांकन किया जाएगा। इससे लोगों को न तो घर उजड़ने का डर रहेगा और न ही बार-बार नोटिस या कार्रवाई की चिंता करनी पड़ेगी।अब तक चंबल अभयारण्य के नियमों के कारण इन इलाकों में विकास कार्य अटके हुए थे। सड़क, पानी, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर स्थानीय लोग लंबे समय से परेशान थे।
बस्तियों के विकास का रास्ता हुआ साफ
नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन बस्तियों में विकास कार्यों का रास्ता साफ होगा। इस फैसले से न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रशासन और वन विभाग के बीच चल रहा पुराना विवाद भी काफी हद तक सुलझेगा। लोगों का कहना है कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं, लेकिन अब जाकर उन्हें स्थायी पहचान और सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। चंबल के किनारे रहने वाले परिवारों के लिए यह फैसला सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में इसका असर शहर की तस्वीर और लोगों की जिंदगी दोनों पर साफ दिखाई देगा।









