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Rajasthan Roadways: राजस्थान पथ परिवहन निगम ने निगम कार्मिकों के लिए नया नियम लागू किया है। अब अगर किसी बस में यात्री बिना टिकट मिलते हैं, तो कंडक्टर को अपने गृह जिले से बाहर 5 साल तक काम करना होगा। 

Rajasthan Roadways: राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम मुख्यालय ने प्रदेश में चलने वाली बसों को लेकर नया नियम लागू किया है। इस नियम के अनुसार अब सभी निगम कार्मिकों को लेकर निगम ने यह फैसला किया है। इस आदेश के अनुसार अब निगम कार्मिकों को अगर कहीं स्थानांतरण किया जाता है, तो 2 साल से पहले वह पूर्व स्थल पर नहीं आ सकेंगे। इसका मतलब स्थानांतरण के जगह पर कम से कम 2 साल काम करना अनिवार्य कर दिया गया है।

बीमारियों से जूझ रहे कार्मिकों को मिलेगी प्राथमिकता 

इसके अलावा गृह जिले में जिन कार्मिकों को ड्यूटी मिलेगी, या फिर गृह जिले में जिन कार्मिकों को ड्यूटी मिलेगी, इसमें उन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट रोग या फिर किसी अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होंगे। अभी तक ऐसा हो रहा था कि जिसके बेहतर कनेक्शन होते थे, वह अपना ट्रांसफर अपने गृह जिले में कर लेते थे, लेकिन अब गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कार्मिकों को इसमें प्राथमिकता देने का ऐलान किया गया है। 

अन्य जिले में 5 साल करना होगा काम 

अगर किसी बस में तीन या तीन से अधिक लोग बिना टिकट पाए जाते हैं, तो इस पर भी बस के कंडक्टर पर गाज गिरने वाली है। इस आदेश में यह भी कहा गया है अगर किसी बस में बिना टिकट यात्री पाए जाते हैं, तो उन्हें अपने गृह जिले से किसी अन्य जिले में 5 साल तक के लिए तबादला कर दिया जाएगा। अगर वर्तमान में कोई कंडक्टर अपने गृह जिले के अलावा किसी दूसरे जिले में काम कर रहा है और वहां उस बस में यात्री बिना टिकट के पाए जाते हैं, तो उस कंडक्टर को पहले तो उस जिले में 3 साल बिताना होगा।

इसके अलावा किसी अन्य जिले में उसे 5 साल बिताना होगा। नियमों में सुधार के लिए पथ परिवहन निगम ने यह कड़ा रूप अपनाया है। अब देखने वाली बात होगी कि इससे व्यवस्था में कितनी सुधार होती है। 

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