Jaipur Traffic Problem : जयपुर की सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शहर की सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। मास्टर प्लान 2025 के बावजूद राजधानी की कनेक्टिविटी उस स्तर तक नहीं पहुंच सकी, जिसकी जरूरत तेजी से बढ़ते वाहन दबाव के बीच थी। हालात यह हैं कि मुख्य मार्गों के साथ-साथ संपर्क सड़कें भी ट्रैफिक भार से जूझ रही हैं और जाम अब केवल पीक आवर्स तक सीमित नहीं रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब मास्टर प्लान से पहले एक ठोस और व्यावहारिक मोबिलिटी प्लान की जरूरत है। ट्रैफिक पुलिस, आमजन और तकनीकी एजेंसियों के सुझावों के आधार पर जेडीए, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को समन्वित रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारना होगा।
मास्टर प्लान 2025 में कनेक्टिविटी सबसे कमजोर कड़ी
आपको बता दें की 2025 मास्टर प्लान के तहत जयपुर सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने का प्लान था। लेकिन जमीनी स्तर की बात कर तो इसका कोई क्रियान्वयन नहीं हुआ। इसका नतीजा सामने यह निकाल कर आया की मुख्य मार्ग के साथ-साथ कनेक्ट सड़क ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रही है।
सिग्नल फ्री चौराहे, फ्लाईओवर और एलिवेटेड रोड की बढ़ी मांग
राजधानी जयपुर को जाम से निजात दिलाने के लिए 25 स्थानों पर ग्रेड सेपरेटर, 5 एलिवेटेड रोड और रेलवे क्रॉसिंग पर नए आरओबी-आरयूबी की आवश्यकता है।अजमेर रोड, क्वींस रोड, खातीपुरा तिराहा, ट्रांसपोर्ट नगर से झालाना बाइपास होते हुए अरण्य भवन व राजपार्क, पानीपेच से कलेक्ट्रेट और चांदपोल-पानीपेच मार्ग के इन इलाकों में एलिवेटेड रोड की आवश्यकता है।
जेएलएन और अजमेर रोड पर ट्रैफिक का भारी दबाव
अजमेर रोड से सीतापुर तक लगभग प्रतिदिन करीब 3 से 4 लाख वाहन गुजरते हैं। फ्लावर होने के बावजूद भी ट्रैफिक दबाव बना हुआ रहता है। सरसी लिंक रोड, गोवर्धन नगर, कनकपुरा, हाथोज, जगतपुरा, बिंदायका रामपुरा फाटक, गोविंदपुरा और धानक्य जैसे इलाकों में आरओबी-आरयूबी की आवश्यकता है।
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