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Rajasthan Education News: अजमेर में पहली बार असाक्षरों की ऑनलाइन टैगिंग की जाएगी। 2027 तक पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य है।

Rajasthan Education News: अजमेर जिले में पहली बार असाक्षर महिला-पुरुषों की डिजिटल टैगिंग ‘उल्लास’ मोबाइल एप के जरिए की जाएगी। राज्य सरकार के नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत शुरू किए गए इस अभियान में सरकारी स्कूलों के शिक्षक घर-घर जाकर 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर लोगों की पहचान करेंगे और उनका पूरा डेटा ऑनलाइन फीड करेंगे। शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य सरकार के नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत शुरू किए गए इस अभियान में सरकारी स्कूलों के शिक्षक घर-घर जाकर 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों की पहचान करेंगे और उनका पूरा डेटा ऑनलाइन फीड करेंगे। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई हैं। जिले में इस साल 30 जून तक 82,600 असाक्षरों की पहचान और लर्नर वीटी टैगिंग करनी है। इनमें 20,650 पुरुष और 61,950 महिलाएं शामिल हैं। शिक्षा विभाग इसे "पूर्ण साक्षर राजस्थान" मिशन की दिशा में सबसे बड़ा डिजिटल सर्वे अभियान मान रहा है।

अभियान में महिलाओं की निरक्षरता सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कुल लक्ष्य में लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं अब भी बुनियादी शिक्षा से दूर हैं। अभियान में स्वयंसेवकों की भी मदद ली जाएगी। कक्षा 5 से ऊपर के विद्यार्थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, स्काउट-गाइड, एनसीसी छात्र, बीएड-डीएलएड विद्यार्थी, सरकारी शिक्षक और पूर्व सैनिक इसमें भाग लेंगे। ये सभी निशुल्क सेवाएं देंगे।

मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2027 तक राज्य को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत चिह्नित लोगों को पढ़ना, लिखना, संख्यात्मक ज्ञान और जीवनोपयोगी कौशल सिखाए जाएंगे। वर्ष में दो बार सितंबर और मार्च में स्थानीय विद्यालयों में मूल्यांकन परीक्षा होगी। बताते चलें कि जिला कलक्टर द्वारा सभी ब्लॉकों को लक्ष्य आवंटित कर दिए गए हैं। सीबीईओ कार्यालयों ने भी पीईईओ और यूसीईईओ के माध्यम से विद्यालयों तक लक्ष्य भेजना शुरू कर दिया है। अब शिक्षकों को अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों की पहचान करनी होगी, जो कभी स्कूल नहीं गए या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। वहीं सहायक योजना अधिकारी भंवर सिंह राठौड़ ने बताया कि सर्वेयर शिक्षकों को 'उल्लास' मोबाइल एप डाउनलोड करना होगा। चिह्नित प्रत्येक असाक्षर व्यक्ति की जानकारी एप पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।

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