Rasjasthan Hospital: आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर रिसर्च सेंटर में केंद्र में एक बड़ी लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। जहां एक कैंसर मरीज कीमोथेरेपी चढ़ने के बाद उसे पैरालिसिस हो गया। ऐसे में अस्पताल पर आरोप लगाया जा रहा है कि गंभीर स्थिति के बावजूद तीन दिन तक किसी भी सीनियर डॉक्टर ने मरीज को नहीं देखा।
डॉक्टर ने केवल जांच लिखी
मरीज के पति कृष्ण लाल का कहना है कि वह अपनी पत्नी मुक्ता देवी को 25 दिसंबर को हनुमानगढ़ से इलाज के लिए बीकानेर लाए थे। जहां 31 दिसंबर को कैंसर विभाग में डॉक्टर मुकेश सिंघल को दिखाने के बाद मरीज को कीमोथेरेपी दी गई। कीमोथेरेपी चढ़ाने के बाद महिला के हाथ-पैर और आधे शरीर ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद डॉक्टर ने सिर्फ एमआरआई समेत बाकी जांच करवाने के लिए लिख दिया।
अस्पताल में लापरवाही के कई मामले सामने आ चुके हैं
परीजनों का कहना है कि सभी जांच करवा लेने के बाद भी न तो पैरालिसिस का इलाज शुरू किया गया और न ही किसी सीनियर डॉक्टर ने मरीज को देखा। वहीं पहले भी अस्पताल में लापरवाही के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में लगातार आ रही लापरवाही के मामलों ने कैंसर विभाग की कार्य प्रणाली और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा का कहना है कि पूरे प्रकरण में डॉक्टरों से रिपोर्ट ली जाएगी और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।









