Supreme Court Order: बांडी, लूणी और जोजरी नदियों में औद्योगिक प्रदूषण और अवैध खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि इन नदियों को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों को हटाया जाए। इन्हें उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने का किया जाए। यह आदेश जस्टिस विक्रम अधिकार जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दिया।
अवैध पाइपलाइन और आउटलेट तुरंत बंद करो
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत क्षमता से अधिक लगी रंगाई-छपाई मशीनों को सील करना पर्याप्त ही नहीं है, क्योंकि दोबारा चालू कर दिया जाता है। ऐसी मशीनों को हटाना अनिवार्य होगा। साथ ही कोर्ट ने राज्य की नौकरशाही की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सरकारी मशीनरी को केवल 'शिकायत मिलने पर जागने वाली' नीति छोड़कर सक्रिय रवैया अपनाना होगा। जब तक अवैध इकाइयों और प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली संभव नहीं है। साथ ही, नियामक ढांचे को उद्योगों के लिए बाधा बनने के बजाय ट्रीटमेंट सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। सीईटीपी और ईटीपी के लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए मुख्य सचिव स्तर पर सिंगल विंडो नोडल सिस्टम बनाया जाएगा, ताकि तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियां तय समय में मिल सकें। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को होगी।
ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की जांच कर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एसआईटी की जांच और मैपिंग में चिह्नित अवैध पाइपलाइनों, बाइपास, मैनहोल और आउटलेट्स को तत्काल बंद या ध्वस्त किया जाएगा। विस्तृत सर्वे पूरा होने का इंतजार किए बिना यह कार्रवाई करनी होगी। हर 15 दिन में इसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट देनी होगी। बता दें कि ऐसी कंपनियों को ऑर्डर देने वालों पर भी सख्ती कृषि या आवासीय भूमि पर चलने वाली फैक्ट्रियां पकड़े जाने पर केवल उन्हें सील नहीं किया जाएगा। ऐसी फैक्ट्रियों को कच्चा माल और जॉब वर्क ऑर्डर देने वाली कंपनियों के साथ ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की जांच कर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।








