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Rajasthan Hospital: SMS अस्पताल के IPD टावर में खुले सब-स्टेशन की जगह अब GIS सिस्टम बनेगा। आइए जानते हैं ऐसे में क्या फायदा होगा।

Rajasthan Hospital: एसएमएस अस्पताल के 24 मंजिला आईपीडी टावर की बिजली व्यवस्था भी हाईटेक होने की तैयारी की जा रही है। आपको बता दें कि यहां परंपरागत ओपन-एयर सब-स्टेशन के बजाय गैस इंसुलेटेड स्विचगियर (जीआईएस) बिल्डिंग बनेगी। वहीं जेडीए इस पर 1.62 करोड़ खर्च करेगा और इसके लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। खुलेसब-स्टेशन की तुलना में जीआईएस के हाई-वोल्टेज उपकरण बंद मेटल एनक्लोजर में रहते हैं, इसलिए आंधी, बारिश, - धूल, तेज गर्मी और बाहरी वातावरण से फॉल्ट का जोखिम कम रहता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अस्पताल के आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, वेंटिलेटर, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए बिजली सप्लाई ज्यादा सुरक्षित और विश्वसनीय रहेगी।

MRI से लेकर वेंटिलेटर तक को मिलेगी सुरक्षित सप्लाई

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि IPD टावर में एक साथ सैकड़ों मरीजों के इलाज के साथ ICU, वेंटिलेटर, ऑपरेशन थिएटर, डायग्नोस्टिक मशीनें और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम संचालित होंगे। ऐसे में बिजली व्यवस्था में थोड़ी देर की बाधा भी गंभीर हो सकती है। इसी जरूरत को देखते हुए टावर के लिए कॉम्पैक्ट और हाई-रिलायबिलिटी GIS आधारित पावर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

बिजली फॉल्ट का खतरा होगा कम

एसएमएस अस्पताल जैसे घने और व्यस्त परिसर में जमीन की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। सामान्य ओपन-एयर ग्रिड सब-स्टेशन के मुकाबले GIS सिस्टम करीब 80% तक कम जगह में स्थापित किया जा सकता है। इसी कारण आईपीडी टावर के लिए ओपन सब-स्टेशन की जगह कॉम्पैक्ट GIS बिल्डिंग चुनी गई है। GIS तकनीक में उपकरणों को खुले वातावरण में रखने के बजाय गैस-इंसुलेटेड मेटल चैंबर में रखा जाता है। इससे हाई-वोल्टेज उपकरणों के बीच सुरक्षित इंसुलेशन बना रहता है और स्पार्किंग या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट का खतरा कम होता है। उपकरण इनडोर होने से मेंटेनेंस भी अपेक्षाकृत कम होता है।

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