Rajasthan Teacher Transfer Policy: राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य में टीचरों के ट्रांसफर के संबंध में सरकार के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ज़्यादातर राज्यों में टीचरों और कर्मचारियों के ट्रांसफर को लेकर कोई प्रभावी ट्रांसफर पॉलिसी और साफ़ नियम नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि एकेडमिक सेशन के बीच में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर करना गलत है और शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है।
प्रिंसिपलों का बड़े पैमाने पर ट्रांसफर: प्रशासनिक मनमानी
राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस अशोक जैन की सिंगल-जज बेंच ने प्रिंसिपल हरगोविंद मीणा के ट्रांसफर ऑर्डर की सुनवाई करते हुए और उस पर अंतरिम रोक लगाते हुए यह टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि सरकार को एकेडमिक कैलेंडर की जानकारी होने के बावजूद, सितंबर में बड़ी संख्या में प्रिंसिपलों का ट्रांसफर करना यह दिखाता है कि शिक्षा व्यवस्था छात्रों की ज़रूरतों के बजाय प्रशासनिक मनमानी के आधार पर चलाई जा रही है।
4,527 प्रिंसिपलों का बड़े पैमाने पर ट्रांसफर
कोर्ट ने कहा कि 22 सितंबर, 2025 को एकेडमिक सेशन के बीच में 4,527 प्रिंसिपलों के बड़े पैमाने पर ट्रांसफर से न सिर्फ़ टीचर बल्कि उतनी ही संख्या में स्कूल और छात्र भी प्रभावित हुए। कोर्ट ने ऐसी प्रथाओं को निंदनीय बताया और कहा कि सरकार को टीचरों का ट्रांसफर गर्मियों की छुट्टियों (डेढ़ महीने की गर्मियों की छुट्टी) के दौरान करना चाहिए, न कि एकेडमिक सेशन के बीच में।
पांच महीने के अंदर दूसरा ट्रांसफर
कोर्ट ने इस मामले में राजस्थान सिविल सर्विसेज़ अपीलेट ट्रिब्यूनल (RAT) के कामकाज पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का पांच महीने के अंदर दूसरी बार ट्रांसफर किया गया, लेकिन RAT ने मामले की खूबियों पर विचार किए बिना एक अनुचित और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। यह तब हुआ जब RAT ने कई ऐसे ही मामलों में ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक लगाई थी।
कोर्ट ने कहा कि RAT के चेयरमैन और सदस्यों से निष्पक्षता और बिना किसी भेदभाव के काम करने की उम्मीद की जाती है। जब RAT सरकारी कर्मचारियों की शिकायतों को दूर करने का प्राथमिक मंच है, तो कोर्ट मूक दर्शक नहीं बना रह सकता।
कोर्ट ने कार्मिक विभाग को निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए RAT के चेयरमैन और सदस्यों को उचित ट्रेनिंग दी जाए।







