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Rajasthan Hospital: जयपुर के सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थ काफी ज्यादा बिगड़ी हुई है। ऐसे में नर्सिंग ऑफिसरों से गैर-चिकित्सीय काम करवाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं पूरी खबर।

Rajasthan Hospital: राजधानी के एसएमएस हॉस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ की कमी और कर्मचारियों की गैर-चिकित्सीय कार्यों में ड्यूटी लगाए जाने का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन ने 38 कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी लगते ही इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित होने का हवाला देते हुए उनकी ड्यूटी निरस्त कराने के लिए पत्र भेज दिया। वहीं दूसरी ओर अस्पताल और इससे जुड़े संस्थानों में बड़ी संख्या में नर्सिंग ऑफिसरों को मूल नर्सिंग कार्यों की बजाय बिजली, पानी, लॉन्ड्री और किचन जैसी व्यवस्थाओं में लगाया गया है

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चिकित्सा विभाग व मुख्यमंत्री कार्यालय तक जवाब मांग चुका है, इसके बावजूद हालात नहीं बदल रहे। एसएमएस हॉस्पिटल में 70 से ज्यादा अनुभवी नर्सिंग ऑफिसरों को हेल्प डेस्क, ऑक्सीजन प्लांट व लॉन्ड्री कार्यों में लगा रखा है। 20 नर्सिंगकर्मी हेल्प डेस्क, 25 ऑक्सीजन प्लांट, 12 की लॉन्ड्री, 5 की सुपरवाइजर ऑफिस, 10 की बायोवेस्ट व अन्य की मेंटेनेंस वगैरह में ड्यूटी लगा रखी है।

भीषण गर्मी में मरीजों की संख्या बढ़ी, कर्मचारियों की कमी

महिला चिकित्सालय, सांगानेरी गेटः 1 नर्सिंग ऑफिसर की ड्यूटी वाहन शाखा और एक की विद्युत शाखा में लगी हुई है। इसके अलावा रिकॉर्ड रूम में 1, पूछताछ व पीबीएक्स में 1, 2 की अधीक्षक के साथ, 5 की भंडार शाखा के अलावा, स्टेशनरी, लॉन्ड्री, जननी सुरक्षा योजना में भी नर्सिंग ऑफिसर की ड्यूटी लगा रखी है।

जनाना हॉस्पिटल, चांदपोल: किचन में 3, जननी सुरक्षा योजना में 2, वर्कशॉप में 2, पीडब्ल्यूडी में 1, साफ-सफाई देखरेख में 2 और ऑक्सीजन प्लांट के काम में 1 नर्सिंग ऑफिसर की ड्यूटी है, जो नर्सिंगकर्मी वार्ड, इमरजेंसी, आईसीयू व ओटी में ड्यूटी करते हैं, उनकी नाइट ड्यूटी भी लगती है। ऐसे में वे भी व्यवस्था का विरोध करते हैं।

महिला और जनाना हॉस्पिटल में भी यही हालात हैं। यहां रोज 150 से ज्यादा डिलिवरी और ऑपरेशन होते हैं। कई नर्सिंग कर्मचारियों की ड्यूटी वार्ड, आईसीयू में न होकर अन्य कामों में लगा रखी है।

नर्सिंग ऑफिसर ही नहीं, डॉक्टर भी दूसरे कार्यों में लगे हुए हैं, इससे मरीजों की सेवाएं प्रभावित होती हैं। नर्सिंगकर्मियों का कहना है कि उनका मूल कार्य मरीजों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल देना है, जबकि उन्हें तकनीकी और क्लर्क स्तर के कार्यों में लगाया जा रहा है। उन्होंने अस्पतालों में अतिरिक्त स्टाफ भर्ती की मांग भी उठाई है।

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