Rajasthan District Councils: प्रदेश में जिला परिषदों के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने अहम निर्णय लिया है, जिसे नौकरशाही के भीतर ‘पावर शिफ्ट’ के तौर पर देखा जा रहा है। नवगठित 8 जिला परिषदों के लिए जारी आदेश में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद को अब स्पष्ट रूप से राजस्थान ग्रामीण विकास सेवा (आरडीएस) कैडर से जोड़ दिया गया है। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल की ओर से जारी इस आदेश ने प्रशासनिक व्यवस्था में नई दिशा तय की है।
ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार डीडवाना-कुचामन, बालोतरा, फलोदी, सलूम्बर, कोटपूतली-बहरोड़, ब्यावर, डीग और खैरथल-तिजारा जैसे नवगठित जिलों की परिषदों के लिए कुल 88 नए पदों का सृजन किया गया है। इनमें सबसे अहम पद सीईओ का है, जिसे अब स्थायी रूप से आरडीएस कैडर के तहत रखा गया है। यानी अब यह पद केवल 'पोस्टिंग' नहीं, बल्कि कैडर-आधारित नियुक्ति की दिशा में बढ़ता दिख रहा है।
पदों में भी की गई बढ़ोतरी
आदेश के मुताबिक प्रत्येक जिला परिषद में दो चालक और दो सहायक कर्मचारियों के पद भी स्वीकृत किए गए हैं। ये संविदाकर्मी होंगे। सीईओ के अलावा प्रत्येक जिला परिषद में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, परियोजना लेखा अधिकारी, सहायक लेखाधिकारी ग्रेड-द्वितीय, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, निजी सहायक, सूचना सहायक और वरिष्ठ सहायक के एक-एक पद होंगे। साथ ही प्रत्येक जिला परिषद में कनिष्ठ सहायक के तीन-तीन पद स्वीकृत किए गए है। अभी आरडीएस सुपर टाइम स्केल के 52 अधिकारी हैं। इन्हीं में से आठ जिलों में अभी सीईओ बनेंगे। संभाग मुख्यालयों पर आईएएस लगाए जाएंगे। शेष जिलों में आरएएस देखे जा सकते हैं। हमें सभी परिषदों में मौका मिलना चाहिए।
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विशेषज्ञों के अनुसार इस निर्णय से जिला परिषदों में योजनाओं के क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग और प्रशासनिक कार्यों में आरडीएस अधिकारियों की भूमिका और मजबूत होगी। साथ ही यह कदम स्थानीय प्रशासन को अधिक विशेषज्ञ और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









