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Pregnancy Health: पथरी के इन लक्षणों को गलती से भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं थोड़ी सी भी लापरवाही मां और बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है।

Pregnancy Health: प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान कमर या पेट के एक तरफ तेज दर्द, पेशाब करते समय जलन या पेशाब में खून दिखाई दे तो इसे केवल गर्भावस्था की सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन लक्षणों की एक वजह किडनी स्टोन यानी पथरी भी हो सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गर्भावस्था में पथरी का इलाज थोड़ा अलग तरीके से किया जाता है, क्योंकि डॉक्टर को मां के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होता है।

अगर डॉक्टर को किडनी स्टोन का शक होता है, तो आमतौर पर सबसे पहले अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इसमें एक्स-रे रेडिएशन नहीं होता। हर पथरी में तुरंत ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। अगर दर्द नियंत्रित है, पेशाब का रास्ता बंद नहीं है और संक्रमण के लक्षण नहीं हैं, तो डॉक्टर निगरानी के साथ इलाज कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान खुद से कोई पेनकिलर या पथरी की दवा लेना ठीक नहीं है। कुछ दर्द निवारक दवाएं गर्भावस्था के खास चरणों में नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए डॉक्टर गर्भावस्था के कितने सप्ताह चल रहे हैं और मरीज की स्थिति कैसी है, इसे ध्यान में रखते हुए सुरक्षित दवा का चुनाव करते हैं।

जानें कब सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है?
अगर पथरी की वजह से पेशाब का रास्ता गंभीर रूप से ब्लॉक हो जाए, तेज दर्द लगातार बना रहे, किडनी पर असर पड़ रहा हो या पेशाब में संक्रमण हो और दवाओं से स्थिति ठीक न हो, तो प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में यूरेटरिक स्टेंट या नेफ्रोस्टॉमी जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कुछ मामलों में विशेषज्ञ डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान यूरेटेरोस्कोपी के जरिए पथरी निकालने पर भी विचार कर सकते हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
तेज या लगातार कमर-पेट का दर्द, बुखार या ठंड लगना, पेशाब में खून, पेशाब कम आना या पेशाब करते समय तेज जलन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। खासकर बुखार के साथ पथरी का शक हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि संक्रमण मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

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