Indian Railway: धार्मिक यात्रा को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए IRCTC और भारतीय रेलवे ने नई पहल शुरू की है। ‘दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा’ नाम से एक खास ट्रेन सेवा शुरू की गई है, जो पूर्वी भारत के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ेगी। श्रद्धालुओं की बढ़ती मांग को देखते हुए इस रेल आधारित पर्यटन सर्किट को तैयार किया गया है, ताकि यात्री एक ही सफर में कई प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के दर्शन कर सकें।
क्या है ‘दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा’?
दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा भारत के पूर्वी हिस्से के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ने वाली यात्रा है। रेलवे और आईआरसीटीसी की माने तो धार्मिक स्थलों के रूट पर पर्यटनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर पूर्वी क्षेत्र में पढ़ने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों की ओर लगातार लोगों की रुचि बढ़ रही है इसी को ध्यान में रखते हुए यह रेल यात्रा शुरू की गई है। इसी यात्राओं को एक ही यात्रा में कई स्थानों के दर्शन हो सकेंगे।
क्या है दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा का रूट?
इस विशेष रेलयात्रा के तहत यात्राओं को भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक ले जाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इस यात्रा में वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम जैसे धाम शामिल हैं। रेलवे ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस यात्रा को इस तरह डिजाइन किया है कि उन्हें कम थकान हो और हर स्थान में पर्याप्त समय मिले।
कब शुरू होगी ट्रेन?
रेलवे की यह यात्रा कुल 10 दिनों की होगी। यह विशेष ट्रेन 9 मार्च को दिल्ली से रवाना होगी और 18 मार्च को वापस दिल्ली लौटेगी। इस दौरान यात्रियों के ठहरने, भोजन और स्थानीय दर्शन व्यवस्था का भी प्रबंधन किया जाएगा। इन दोनों धार्मिक यात्राओं में इस तरह की विशेष ट्रेन का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर बुजुर्गों और परिवार के साथ ऐसी खास ट्रेनों का लोग इंतजार करते हैं।
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