Varuthini Ekadashi: सनातन धर्म में एकादशी का पर्व बहुत ही ज्यादा शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा व्रत करते हैं। क्योंकि यह व्रत भगवान श्री हरि नारायण को समर्पित है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक एकादशी के दिन विधि विधान से व्रत रखते हैं उन्हें जन्मों जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है।
आपको बता दें कि वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन कुछ उपाय भी किए जाते हैं। इन उपायों को करने से जीवन की सारी परेशानियां खत्म हो जाएंगी। तो आइए इस खबर में उन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
वरुथिनी एकादशी के दिन जरूर करें ये उपाय
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वरुथिनी एकादशी इस साल 12 अप्रैल को है। 12 अप्रैल का दिन जो हैं वह रविवार है। मान्यता है जो जातक इस दिन व्रत रखता है उसे कन्यादान और 10 हजार वर्षों की तपस्या के बराबर फल मिलता है। साथ ही साथ एकादशी से 24 घंटे पूर्व तामसिक या किसी भी प्रकार के मांसाहरी पदार्थ का सेवन करना वर्जित होता है।
आपको बता दें कि तामसिक भोजन में जैसे प्याज, लहसुन, शलजम, बैंगन आदि का जो सेवन हैं वह 11 अप्रैल की सुबह से ही बंद कर देना होगा। वहीं मांसाहारी पदार्थ और मादक पेय पदार्थ की बात करें तो इसमें अंडा, मांस, मछली, शराब, गुटखा, खैनी और सिगरेट जैसी चीजों को नहीं खाना चाहिए।
इन कार्यों को करने से मिलते हैं विपरीत परिणाम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग एकादशी व्रत के दौरान मन में नकारात्मक भाव, दूसरों के प्रति ईर्ष्या, गलत भावना या फिर मन में अपवित्रता आदि आता है तो इससे भगवान विष्णु नाराज हो जाते हैं। साथ ही साथ जिन चीजों को वर्जित किया गया है उसे जाने-अनजाने में सेवन करने और मन में नकारात्मक भाव लाने से जातक के ऊपर व्रत का विपरीत प्रभाव पड़ता है। इन परिणामों का उपाय किसी भी तरह से नहीं हो सकता है।
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