Water Recycling System: शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल सहेलियों की बाड़ी में अब पानी की बर्बादी रोकने के लिए ठोस कदम उठाया जा रहा है। यहां पहली बार वाटर रिसाइक्लिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) नगर खंड 7.76 लाख रुपए की लागत से एक विशेष रिसाइक्लिंग वाटर टैंक बनाएगा।
आपको बता दें कि फिलहाल बाड़ी के फव्वारे चलाने के लिए ट्यूबवेल के पानी का इस्तेमाल होता है। एंट्री गेट और बगीचे में बने छोटे फव्वारों से निकलने वाला पानी उपयोग के बाद नालियों में जमा होकर बेकार बह जाता है। हालांकि कुछ पानी पौधों की सिंचाई के काम आता है, फिर भी बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ चला जाता है। है। ऐसे में नई व्यवस्था में इस पानी को स्टोरेज टैंक में जमा कर रिसाइकिल किया जाएगा और फव्वारों और गार्डन में दोबारा इस्तेमाल में लाया जाएगा। वहीं 7.76 लाख के इस प्रोजेक्ट के लिए निविदा जारी की गई है। इसके तहत 9 नवंबर शाम 6 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। निविदा 10 नवंबर शाम 4 बजे खोली जाएगी। वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद 60 दिन के भीतर काम पूरा करना होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सहेलियों की बाड़ी के मुख्य परिसर की अंदरूनी छतरियों और हाथी वाले फव्वारों के कुंडों में में जमा होने वाले पानी को पहले से ही रिसाइकिल कर इस्तेमाल किया जा रहा है। अब इसी तर्ज पर प्रवेश द्वार और अन्य छोटे फव्वारों के वेस्ट पानी को भी रिसाइकिल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। फतहसागर सूखने पर शुरू हुई थी ट्यूबवेल व्यवस्था बरसों पहले जब फतहसागर झील सूख गई थी, तब सहेलियों की बाड़ी में जलापूर्ति और फव्वारों के संचालन के लिए ट्यूबवेल खोदे गए थे। तब से अब तक यह निर्भरता बनी हुई है। रिसाइक्लिंग सिस्टम चालू होने के बाद फव्वारों के लिए बार-बार ट्यूबवेल से पानी लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे भूजल की भी बचत होगी