DLSA Sikar: सीकर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) के पीड़ितों के लिए न्याय तक पहुंच योजना-2025’ के प्रभावी और व्यवस्थित क्रियान्वयन को लेकर सोमवार से विशेष तैयारी शुरू की गई। इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की ओर से अधिकार मित्रों (पैरा लीगल वॉलेंटियर्स) और पैनल एडवोकेट्स के लिए दो दिवसीय प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

'ट्रेनिंग हैंडबुक एंड मॉड्यूल' के जरिए एडवोकेट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) सेक्रेटरी शालिनी गोयल ने बताया कि वन सीमा क्षेत्रों, आदिवासी बाहुल्य इलाकों और वन्यजीव संघर्ष के सेंसेटिव क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लीगल हैल्प देने के लिए प्रोग्राम शुरू किया गया। काफी समय से शेखावाटी क्षेत्र में आबादी वाले इलाकों में पैंथर, लेपर्ड जैसे वन्यजीवों की पहुंच की घटनाएं बढ़ गई हैं। जिला जज रूपा गुप्ता ने ट्रेनिंग कैंप का उद्घाटन किया। नालसा के दिशा-निर्देशों के तहत जारी 'ट्रेनिंग हैंडबुक एंड मॉड्यूल' के जरिए एडवोकेट्स को ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वन्यजीवों के नाम लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ न हो। चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल बृजेंद्र सिंह रूलानियां ने ट्रेनिंग के बारे में बताया।

पीड़ितों को मिलेगा कानूनी संरक्षण

ट्रेनिंग प्रोग्राम के पहले दिन जिला जज रूपा गुप्ता ने एडवोकेट्स को 'मानव-वन्यजीव संघर्ष न्याय योजना 2025' के तहत लीगल ड्यूटी के बारे में बताया। उन्होंने वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने देने की बात कही। वहीं चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल बृजेंद्र सिंह रूलानियां ने नई योजना के टेक्निकल व प्रैक्टिकल पहलुओं के बारे में बताया। डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल महेश कुमार पटेल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21, 39क, 48क और 51क के साथ विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। प्रोग्राम में आपदा प्रबंधन विभाग के मदन सिंह कुडी, कनिष्ठ सहायक सीताराम जाखड़, वन विभाग के सहायक वन संरक्षक सौरभ कुमार और रेंजर अमित देवंदा ने संबंधित विभागों से जुड़ी जानकारी दी।