OMR Sheet Scam: राजस्थान में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को प्रभावित करने वाला करोड़ों रुपये का एक बड़े पैमाने का घोटाला सामने आया है। सुपरवाइजर (महिला सशक्तिकरण) सीधी भर्ती परीक्षा-2018, लैब असिस्टेंट भर्ती परीक्षा-2018, और कृषि सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा-2018 में, बड़ी रकम के बदले OMR शीट और अंकों में हेरफेर करके अयोग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तत्कालीन टेक्निकल हेड सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

SOG के एडिशनल डायरेक्टर जनरल विशाल बंसल ने बताया कि जांच में पता चला कि परीक्षा परिणाम तैयार करते समय OMR शीट की स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग के बाद आरोपियों ने कंप्यूटर सिस्टम में छेड़छाड़ की। इसके ज़रिए, चुने गए उम्मीदवारों के अंक धोखे से बढ़ाए गए, जिससे अयोग्य उम्मीदवारों का चयन हुआ। अब तक 38 उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, और उनसे पूछताछ की जाएगी। इनमें से कई उम्मीदवारों को पहले ही नौकरी मिल चुकी है।

आउटसोर्स फर्म के साथ मिलकर किया गया घोटाला

तीनों भर्तियों की परीक्षाएं 2019 में हुई थीं। परिणाम तैयार करने के लिए OMR शीट की स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग का गोपनीय काम आउटसोर्स फर्म राहव लिमिटेड (नई दिल्ली) को सौंपा गया था। जांच में पता चला कि फर्म के कर्मचारियों ने बोर्ड के टेक्निकल अधिकारियों के साथ मिलकर OMR शीट स्कैन करने के बाद डिजिटल डेटा में हेरफेर किया। कई मामलों में, OMR शीट की स्कैन की गई कॉपियों में फोटोशॉप का इस्तेमाल करके सही उत्तर भरे गए, जिससे असल अंकों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया।

बोर्ड के टेक्निकल हेड की रिश्तेदार महिला उम्मीदवार गिरफ्तार

जांच में पता चला कि बोर्ड में तैनात संजय माथुर OMR स्कैनिंग और परिणाम प्रक्रिया के प्रभारी थे। उन्होंने अपने सहयोगी प्रवीण गंगवाल और आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों के साथ मिलकर जान-पहचान वाले उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने की साजिश रची। गिरफ्तार महिला उम्मीदवार पूनम माथुर, जो संजय माथुर की रिश्तेदार हैं, भी इस साजिश में शामिल पाई गईं। पूनम के 63 अंक थे, जिन्हें बढ़ाकर 185 कर दिया गया था, हालांकि उनका आखिरकार चयन नहीं हुआ।

जांच समिति में भी घुसपैठ, सच दबाने की कोशिश

DIG पेरिस देशमुख ने बताया कि घोटाला सामने आने के बाद संजय माथुर और प्रवीण गंगवाल को भी चयन बोर्ड की प्रशासनिक जांच समिति का सदस्य बनाया गया था। यह जांच को प्रभावित करने और सबूतों को दबाने की कोशिश थी। संजय माथुर सिलेक्शन बोर्ड बनने के बाद से ही यहां काम कर रहे हैं। SOG अब उनके कार्यकाल के दौरान हुई दूसरी भर्तियों की भी पूरी जांच कर रही है।

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