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Jaipur Heritage Nigam: जयपुर में हेरिटेज निगम में अधिकारियों से मिली भगत कर कॉलोनी और सड़क हड़पने का एक बड़ा मामला सामने आया है। आइए जानते हैं पूरी जानकारी।

Jaipur Heritage Nigam: नाना जी का बाग स्थित फतेह टिब्बा इलाके से जमीन की हेरा फेरी का एक बड़ा मामला सामने आ रहा है। यहां पर पूर्व जमीन मालिकों, एक बिल्डर और हेरीटेज कॉरपोरेशन के अधिकारियों की मिलीभगत से एक कॉलोनी और 30 फुट चौड़ी सड़क कथित तौर पर हड़प ली गई है। आपको बता दें कि इस घोटाले में उस जमीन के लिए अकाल पट्टे जारी करना भी शामिल है, जिसका विभाजन और बिक्री पांच दशक से भी पहले हो चुकी है।

क्या है यहां का इतिहास 

दरअसल 1970 में यूआईटी द्वारा फतेह टिब्बा में 6350 वर्ग मीटर जमीन के विभाजन को मंजूरी दे दी गई थी। जिस वजह से 10 प्लॉट बनाने की अनुमति मिली और साथ ही 30 फुट चौड़ी सड़क भी आरक्षित की गई। आपको बता दें कि यह जमीन लाजवंती देवी, अविनाश अग्रवाल, अशोक अग्रवाल और रतनदास अग्रवाल की थी। उन्होंने उचित मंजूरी के बाद खरीदारों को प्लॉट बेच दिए।

55 साल बाद पुनर्गठन और पट्टे

इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि 2012 में कुछ मूल भू स्वामियों, लाजवंती देवी, अविनाश अग्रवाल और अशोक अग्रवाल ने 3175 वर्ग मीटर भूमि के पुनर्गठन के लिए वापस से आवेदन किया। साथ ही कथित तौर पर पिछले उप विभाजन के रिकॉर्ड भी छुपाए। ठीक इसी तरह रतन दास अग्रवाल के स्वामित्व वाले पांच भूखंडों का भी विवरण छिपाया पाया गया है।

अब 2014 में बसी बसाई योजना को बिना किसी उचित सत्यापन के मंजूरी दे दी गई। इतना ही नहीं बल्कि पिछली सरकार द्वारा चलाए गए प्रशासन शहरों के  साथ अभियान में बिल्डर एमएनएस रियल एस्टेट को 2024 को 3124 वर्ग मीटर के दो एकल पट्टे भी जारी किए गए।

कैसे गायब हुई 30 फुट लंबी सड़क 

अब पुनर्गठन प्रक्रिया के वक्त 30 फुट चौड़ी सड़क जो 1970 के उप विभाजन मानचित्र में स्पष्ट रूप से दिखाई गई थी, वापस से पुनर्गठित लेआउट में शामिल कर ली गई। इसके बाद सार्वजनिक सड़क का रास्ता पूरी तरह से खत्म हो गया और निजी प्लॉटों में मिल गया। बाद में यह प्लॉट बिल्डर को बेच दिए गए।

कैसे आया घोटाला सामने 

इस घोटाले पर से पर्दा तब उठा जब मूल प्लॉटों के खरीदार मौके पर गए और पाया कि कॉलोनी और सड़क गायब हो चुकी है। अब वें प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। 

आगे क्या होगा 

अब इस मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद अधिकारियों द्वारा यह दावा किया गया है की फाइल का पता लगाया जा रहा है। हालांकि धोखाधड़ी के पैमाने और इसमें शामिल उचित मूल्य की जमीन को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च स्तरीय जांच अपरिहार्य है।

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