Chilli Farming Nagaur: राजस्थान जो अपनी संस्कृति और संस्कार के लिए जाना जाता है। यहां ज्यादातर जगह पानी के कमी के चलते किसानों को अच्छी उपज नहीं मिल पाती है। ऐसी कठिन परिस्थितियों के बाद भी नागौर जिला के किसान अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। यहां के रूण क्षेत्र की लाल मिर्च को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि रूण, भटनोखा और आस-पास के गांवों में मिर्च की खेती बहुत ज्यादा की जाती है। यही नहीं हरी मिर्च की तुड़ाई के बाद किसान पारंपरिक तरीकों से उसे धूप में सुखाते हैं, ताकि उसका प्राकृतिक रंग, स्वाद और गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहे।
एक बीघा में होती है 50 क्विंटल मिर्च
यहां के किसान बताते हैं कि न सिर्फ स्थानीय बाजार में बल्कि आसपास के कई जिलों तक रूण क्षेत्र की लाल मिर्च की मांग की जाती है। यहां एक बीघा खेत में लगभग 50 क्विंटल हरी मिर्च हो जाती है। इस मिर्च को बाजार में बेचकर महज 1 ही सीजन में अनुमानित 3 लाख की कमाई कर लेते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें पूरे सीजन कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पूरे सीजन में करीब 15 से 16 पर खेती में पानी सीचना होता है और 3 से 5 बार तुड़ाई करनी होती है।
बाजार में व्यापारी सीधे किसानों से करते हैं खरीदी
रूण क्षेत्र में उत्पादित हरी और सूखी लाल मिर्च को लोग खूब पसंद करते हैं। यही कारण है कि इसकी बिक्री नागौर, हरसोलाव, पुष्कर और जोधपुर जैसे प्रमुख बाजारों में ज्यादा होती है। इन बाजारों के व्यापारी किसानों से सीधे संपर्क करते हैं और मिर्च खरीद लेते हैं। इससे एक तरफ किसानों को अच्छा पैसा मिल जाता है दूसरी तरफ व्यापारियों को भी शुद्ध मिर्च मिलती है। साल 2024 में हरी मिर्च की कीमत ₹80 से डेढ़ सौ रुपए प्रति किलो तक रही वहीं, लाल मिर्च की कीमत 200 से ₹300 प्रति किलो रही। बीते वर्ष 2025 में हरी मिर्च 100 से 150 रुपए प्रति किलो बिकी तो लाल मिर्च 200 रुपए से 300 रुपए तक बिकी।
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