राजस्थान डेस्क: भरतपुर के राज बहादुर मेमोरियल (आरबीएम) अस्पताल में तैनात नर्सिंगकर्मियों ने सोमवार को सरकार के खिलाफ अनोखा और औपचारिक प्रदर्शन किया। नर्सिंगकर्मियों ने मुख्या मंत्री और चिकित्सा मंत्री को अपने खून से करीब 200 पोस्टकार्ड भेजकर अपने मांगो की तरफ आकर्षित करने की कोशिश की। नर्सिंगकर्मियों ने अपनी मांग में आने वाली भर्ती में प्रक्रिया में 1965 के नियम को जारी रखने और बोनस अंकों के आधार पर भर्ती किए जाने की मांग कर रहे हैं।
नर्सिंगकर्मियों का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से कम वेतन पर सेवाएं दे रहे हैं और अब सरकार भर्ती नियमों में बदलाव कर परीक्षा के माध्यम से भर्ती करना चाहती है। नर्सिंगकर्मी भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि 1965 के नियम के तहत काम कर रहे नर्सिंगकर्मियों को उनके अनुभव के आधार पर बोनस अंक दिए जाने का शर्त है। एक वर्ष के अनुभव पर 10 प्रतिशत, दो वर्ष पर 20 प्रतिशत और तीन वर्ष के अनुभव पर 30 प्रतिशत बोनस अंक मिलते हैं, जिसके आधार पर भर्ती की जाती है। नर्सिंगकर्मियों का आरोप है की सरकार इस नियम को बदल कर उनके साथ अन्याय करना चाहती है।
उनका कहना है कि, "2013, 2018 और 2022-23 की भर्तियां भी बोनस मेरिट के आधार पर की गई थी। ऐसे में अब नियम बदलने का कोई सही वहज नहीं है। करीब 4 हज़ार नर्सिंगकर्मी भर्ती का इंतज़ार कर रहे है और 3 से 4 हज़ार नर्सिंगकर्मियों को स्थायी करने की भी मांग की जा रही है। प्रदर्शन कर रहे नर्सिंगकर्मियों ने चेतावनी भी दी है की अगर सरकार ने उनकी मांगो पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो वो आंदोलन को और तेज़ करेंगे। फ़िलहाल उन्होंने इसे नाम मात्र का विरोध बताया है, लेकिन अगर मांगे पूरी नहीं हुई तो सड़कों पर उतर कर बड़ा आंदोलन करने की भी बात की है। उनका कहना है की सरकार को उनकी मेंहनत और अनुभव का सम्मान करना चाहिए और बोनोस के आधार पर जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। अब देखना ये है की सरकार इस अनोखे विरोध के बाद नर्सिंगकर्मियों की मांगो पर क्या रुख अपनाती है।