Rajasthan Panchayati Raj: राजस्थान में त्रि-स्तरीय पंचायती राज चुनावों के बाद ग्रामीण और शहरी शासन में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारियां भी कर ली है। आपको बता दें कि नवनिर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों (सरपंच, प्रधान, वार्ड पंच, और जिला परिषद सदस्यों) के लिए एक विशेष नेतृत्व और क्षमतावर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। वहीं इस विशेष ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण राजनीति में पैर पसार चुके 'सरपंच पति' या 'प्रधान पति' कल्चर को पूरी तरह समाप्त करना है, ताकि निर्वाचित महिलाएं किसी पुरुष रिश्तेदार के दबाव के बिना खुद अपने विवेक से कामकाज संभाल सकें। बताया जा रहा है पंचायती राज संस्थानों के चुनाव परिणामों में 80 हजार से ज्यादा महिलाएं जीतकर आएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें यदि कोई निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि अपने किसी पुरुष रिश्तेदार, पति या झुकाव वाले व्यक्ति को आधिकारिक बैठकों में भेजती है या अपने कार्यालयी कार्यों में हस्तक्षेप करने देती है, तो इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही माना जाएगा। ऐसी स्थिति में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-38 के तहत संबंधित महिला जनप्रतिनिधि को निलंबित या पद से बर्खास्त किया जा सकता है। इतना ही नहीं, हस्तक्षेप करने वाले पतियों/रिश्तेदारों और ऐसा करने की छूट देने वाले सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पहली बार चुनकर आई महिला प्रतिनिधियों के पास प्रशासनिक अनुभव और पंचायती राज नियमों की जानकारी नहीं होती, जिसका फायदा उठाकर उनके पति या पुरुष रिश्तेदार सारे फैसले खुद लेने लगते हैं। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए इस ट्रेनिंग मॉड्यूल को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।