Rajasthan Government Scheme: राजस्थान सरकार की शिक्षा विभाग मिड डे मील में दूध योजना को लेकर जितने भी पैसे खर्च कर रही है, वह बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं है, क्योंकि सरकार हर साल मिड डे मील में मिलने वाले दूध पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन बच्चे उसे दूध को पीते ही नहीं है और इसका कारण है दूध की खराब क्वालिटी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों से जो तस्वीर निकलकर सामने आ रही है, इससे प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिलती है।

हर साल 722 करोड़ का पिलाया जा रहा दूध

प्रदेश में बाल गोपाल योजना के तहत 68000 स्कूलों के 54 लाख बच्चों को सालाना 722 करोड़ रुपए का दूध पिलाया जाता है। लेकिन पाउडर वाले दूध बच्चों को पसंद नहीं है और इस कारण से यह रख रखा एक्सपायर हो जाता है, जिसके कारण अंतत इसे फेंक दिया जाता है। मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग में मिड डे मील को बेहतर ढंग से लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन यह कितना बेहतर ढंग से लागू हो रहा है, यह स्कूलों से निकलने वाली तस्वीर साफ करती है।

कई स्कूलों में नहीं हो रहा दूध का सप्लाई

सरकार तो इसको लेकर खुश हो जाती है कि मैं अपने प्रदेश में मिड डे मील में बच्चों को दूध भी दे रहा हूं, लेकिन बच्चे उसे दूध को पीते हैं या फिर नहीं दूध का वह पैसा कहीं बर्बादी में तो नहीं जा रहा है, इसका फैसला आखिर कौन करेगा।  सलूंबर के राउमावि बस्सी के प्रिंसिपल मुकेश भगवान त्रिवेदी ने कहा कि स्कूल में चार माह से दूध सप्लाई नहीं है और सिर्फ यह स्कूल नहीं है, बल्कि ब्लॉक के कई स्कूलों में दूध नहीं आया और राज्य के कई स्कूलों में दूध पाउडर की सप्लाई भी नहीं हो रही है।

राजस्थान में चल रही मिड डे मील की पोल यहां भी खुल जाती है, जब यह आंकड़े सामने आते हैं कि पहले से आठवीं तक के बच्चों को मिड डे मील मिलने के कारण भी 2.34 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार हो चुके हैं।