Rajasthan Panchayat Elections: राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव किस समय होंगे, इसका आज पता चल सकता है। राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन के चुनाव टालने वाले प्रार्थना पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट आज बड़ा फैसला सुना सकता है। वहीं कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में बीते 21 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। अब यह फैसला आज कोर्ट रूम में सुनाया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को एक साथ 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव हो जाने चाहिए। वहीं भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर इस समय सीमा में चुनाव कराना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं बताया था। इसके साथ ही सरकार ने दिसंबर 2026 तक का समय मांगा था।
सरकार ने चुनाव टालने के पीछे कोर्ट के सामने अपनी दलीलों की पूरी सूची रखी थी। चलिए जानते हैं।
नंबर 1
सरकार का कहना था कि मई-जून में राजस्थान में भीषण गर्मी होती है। वहीं जुलाई से सितंबर तक बरसात का मौसम रहता है और कृषि कार्यों में ग्रामीण मतदाता व्यस्त रहते हैं।
नंबर 2
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 68 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनेंगे, जिनके लिए 4.4 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की जरूरत होगी, जो फिलहाल मुमकिन नहीं है।
नंबर 3
महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी थी कि वार्डों के अतिरिक्त सीमांकन पर दो अलग-अलग फैसले और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने की वजह से आरक्षण तय करने में देरी हुई।
पिछली सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने इन दलीलों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उन्हें चुनाव की तैयारी के लिए पहले से पर्याप्त समय दिया जा चुका है। वहीं जब सरकार ने मौसम और ओबीसी आयोग का हवाला दिया, तो बेंच ने साफ कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो फिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं करवाए गए। ऐसे में आयोग की क्या भूमिका रही, यह कोर्ट के सामने विषय नहीं है।
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कोर्ट ने सरकार के गर्मी और बरसात वाले तर्कों को स्वीकार नहीं करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं दूसरी तरफ पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवेंदा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है।अब अगर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच आज सरकार के प्रार्थना पत्र को खारिज कर देती है, तो सरकार और राज्य चुनाव आयोग को तुरंत चुनाव करवाने पड़ सकते हैं। वहीं अगर कोर्ट से इस मामले में राहत मिलती है, तो राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव के लिए जनता को दिसंबर तक इंतजार करना पड़ सकता है।