Rajasthan Budget: राजस्थान आज आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 11 फरवरी 2026 को विधानसभा में पेश किए गए 2026-27 के बजट ने इस राज्य की आर्थिक यात्रा को एक नया आयाम दिया है। वित्त मंत्री दिया कुमारी द्वारा प्रस्तुत यह बजट कुल 6.11 लाख करोड़ रुपये का है, जो पिछले साल के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। लेकिन सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि पिछले पांच सालों में राजस्थान का बजट दोगुना हो पाया था, लेकिन महज एक साल में इसमें 41% की बढ़त दर्ज की गई है। 

यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह लाखों राजस्थानियों की उम्मीदों, सरकार की नीतियों और आर्थिक सुधारों की एक जीवंत गाथा है। राजस्थान का बजट हमेशा से राज्य की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं का आईना रहा है। 2021-22 में जब दुनिया कोविड-19 की मार झेल रही थी, तब राजस्थान का बजट लगभग 2.95 लाख करोड़ रुपये का था। उस समय राज्य की अर्थव्यवस्था पर महामारी का गहरा असर पड़ा था। 

इसकी वजह से 2023-24 में बजट बमुश्किल 4.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। इसके बाद राजस्थान में भाजपा की सरकार बनी। भजनलाल सरकार के दो साल पूरे होने के बाद बजट 4.33 लाख से बढ़कर 6.11 लाख करोड़ रुपये  हो गया है जो कि एक मील का पत्थर है। यह 2023-24 के बजट से 41% अधिक है, जो की भजनला सरकार के दो साल के कार्यकाल में अभूतपूर्व बढ़त दर्शाता है। वर्ष 2021-22 में राजस्थान का बजट 2.95 लाख करोड़ का था, जो कि 2026-27 में 6.11 लाख करोड़ रुपये का हो गया है। 

पिछले पांच साल में डेढ़ गुणा बढ़ा कर राजस्व

यह बढ़त सिर्फ सरकारी खर्च की नहीं, बल्कि राजस्व संग्रह में सुधार की भी कहानी है। राज्य का अपना कर राजस्व 2021-22 के 90,050 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में अनुमानित 2.28 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें केंद्र से प्राप्त अनुदान और जीएसटी मुआवजा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजस्थान की यह बजटीय बढ़त आकस्मिक नहीं है। 

राज्य की जीएसडीपी 2021-22 के 11.95 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 18.75 लाख करोड़ और 2026-27 में अनुमानित 21.52 लाख करोड़ रुपये पहुंचने की उम्मीद है। प्रति व्यक्ति आय भी 1.34 लाख से बढ़कर 2.02 लाख रुपये हो गई है। यह विकास कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों के संतुलित योगदान से संभव हुआ। इसमें कृषि क्षेत्र का 25.74%, उद्योग 26.55% और सर्विस सेक्टर का योगदान 47.71% है।

केंद्र सरकार की नीतियों से मिली बड़ी मदद

इसमें प्रमुख कारक केंद्र सरकार की नीतियां, जैसे जीएसटी और फाइनेंस कमीशन की सिफारिशें हैं। राजस्थान ने जीएसटी संग्रह में 7.10% की सालाना बढ़त दर्ज की। साथ ही भजनलाल सरकार ने पर्यटन को पुनर्जीवित करने का काम किया। पर्यटकों के बड़ी संख्या में जयपुर, उदयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में आने से राजस्व की बढ़ोतरी हुी। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश ने राज्य को ऊर्जा निर्यातक बनाया। इसके अलावा सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। 

सेक्टर-वाइज आवंटन: विकास के स्तंभ

2026-27 का बजट 'विकसित राजस्थान 2047' के 10 स्तंभों पर आधारित है – इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, जल सुरक्षा, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा कल्याण, सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और पर्यावरण स्थिरता। कुल आवंटन में राजस्व व्यय 3.50 लाख करोड़ और पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ से अधिक है।

*इंफ्रास्ट्रक्चर:* सबसे बड़ा आवंटन 3,427 करोड़ रुपये का है, जिसमें सड़कें, पुल, मेट्रो और शहरी विकास शामिल हैं। 1,800 करोड़ राज्य हाईवे, ROB, RUB आदि के लिए; 1,400 करोड़ नॉन-पैचेबल रोड्स के लिए। यह राजस्थान को कनेक्टिविटी हब बनाएगा, जैसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लाभ। उदाहरण के लिए, जयपुर में मेट्रो विस्तार से दैनिक यातायात आसान होगा, और ग्रामीण इलाकों में 250 अटल प्रगति पथ रोजगार बढ़ाएंगे।

*जल सुरक्षा:* 6,800 करोड़ रुपये टैप वाटर के लिए, जिसमें मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन (शहरी) के तहत 5,000 करोड़ शामिल। अमृत 2.0 योजना से 3 लाख पानी कनेक्शन। यह रेगिस्तानी राज्य के लिए क्रांतिकारी है – थार के गांवों में अब पानी की कमी नहीं रहेगी। सूरजपुरा से चाक्सू तक नई ट्रांसमिशन लाइन (650 करोड़) से जयपुर क्षेत्र受益 होगा।

ऊर्जा: 3,000 करोड़ सोलर पार्क्स के लिए, बिकानेर और जैसलमेर में 4,830 MW क्षमता। छह 220 KV GSS और 110 33 KV GSS का निर्माण। यह राज्य को ग्रीन एनर्जी लीडर बनाएगा, कार्बन उत्सर्जन कम करेगा।

कृषि: 7.59% बढ़त के साथ आवंटन, जिसमें 25,000 करोड़ किसानों के लिए ऋण। केंद्र की योजनाओं से जुड़कर, यह ड्रिप इरिगेशन और ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देगा। राजस्थान के किसान, जैसे जोधपुर के मूंगफली उत्पादक, अब बेहतर बाजार एक्सेस पाएंगे।

शिक्षा और युवा: 400 इनोवेटिव स्कूल्स, युवा कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं। सीएम सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट स्कीम से 10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण। यह बेरोजगारी कम करेगा, खासकर जयपुर जैसे शहरों में।

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा: पेंशन और वेलफेयर स्कीम्स पर फोकस, जिसमें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए प्रावधान। ये आवंटन राज्य की विविधता को ध्यान में रखते हैं – जयपुर की शहरी जरूरतों से लेकर बीकानेर के ग्रामीण इलाकों तक। 

आंकड़े ही नहीं लोगों की जिंदगी में आया बदलाव

यह बजट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन को छूता है। उदाहरण के लिए, जयपुर के एक किसान रामलाल को जल जीवन मिशन से पानी मिला, जिससे उनकी फसल उत्पादन दोगुना हुआ। उदयपुर में सोलर पार्क ने 1,000 नौकरियां पैदा कीं, स्थानीय युवाओं को लाभ। पर्यटन में बढ़त से जोधपुर के होटल मालिकों की आय बढ़ी। ग्रामीण महिलाओं के लिए, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सशक्तिकरण का माध्यम बनीं

भविष्य की दृष्टि: विकसित राजस्थान 2047

यह बजट 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखता है। ग्रीन बजट (27,853 करोड़, कुल का 5.18%) पर्यावरण संरक्षण पर फोकस करता है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से गवर्नेंस बेहतर होगा।

राजस्थान अब सिर्फ पर्यटन राज्य नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल हब है। निवेशकों के लिए बेहतर क्लाइमेट, जैसे लॉजिस्टिक पार्क्स, नई संभावनाएं खोलेंगे। राजस्थान का बजट दोगुना होना और 41% बढ़त एक सफलता की कहानी है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति और नीतियों का परिणाम है। यह राज्य को विकसित भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएगा। लेकिन सफलता के लिए कार्यान्वयन जरूरी है – पारदर्शिता, जवाबदेही और जन भागीदारी। 

राजस्थान की GSDP और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी

राजस्थान ने ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट और प्रति व्यक्ति आय में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की है। 2021-22 से 2025-26 तक के आंकड़े इस विकास की गवाही देते हैं, जहां जीएसडीपी दोगुनी से अधिक हो गई है और प्रति व्यक्ति आय में औसतन 10-12% की सालाना बढ़ोतरी हुई है।

2021-22- 11.96 लाख करोड़ 
2022-23- 13.49 लाख करोड़ (ग्रोथ रेट: 12.80%)
2023-24- 15.22 लाख करोड़ (ग्रोथ रेट: 12.85%)
2024-25- ₹17.01 लाख करोड़ (ग्रोथ रेट: 11.77%)
2025-26- 18.75 लाख करोड़ (ग्रोथ रेट: 10.24%)

यहां से स्पष्ट है कि महामारी के बाद ग्रोथ रेट 10-13% के बीच स्थिर रही, जो रियल ग्रोथ (कॉन्स्टेंट प्राइसेस पर 7-9%) से अधिक है, क्योंकि इसमें महंगाई का प्रभाव शामिल है। कुल मिलाकर, 2021-22 से 2025-26 तक जीएसडीपी में लगभग 57% की बढ़ोतरी हुई, जो राज्य का आर्थिक लचीलापन दर्शाती है।

रियल ग्रोथ (2011-12 कॉन्स्टेंट प्राइसेस पर) भी मजबूत रही:

- 2021-22: 8.93%
- 2022-23: 6.36%
- 2023-24: 7.66%
- 2024-25: 8.77%
- 2025-26: 8.66%

यह राष्ट्रीय औसत (6-7%) से बेहतर है, खासकर सेवा क्षेत्र (47.71% योगदान) और उद्योग (26.55%) के मजबूत प्रदर्शन के कारण। कृषि का योगदान 25.74% रहा, लेकिन मौसम की अनिश्चितता के बावजूद यह स्थिर रहा।

प्रति व्यक्ति आय में साल-दर-साल बढ़ोतरी। प्रति व्यक्ति आय (NSDP पर आधारित, करंट प्राइसेस) राज्य की समृद्धि का सबसे अच्छा मापदंड है, क्योंकि यह जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखती है।

- *2021-22*: ₹1,34,143 (ग्रोथ: लगभग 17%)
- *2022-23*: ₹1,49,060 (ग्रोथ: 11.1%)
- *2023-24*: ₹1,67,027 (ग्रोथ: 12%)
- *2024-25*: ₹1,85,095 (ग्रोथ: 11%)
- *2025-26*: ₹2,02,349 (ग्रोथ: 9.32%)

यहां औसत सालाना बढ़ोतरी 11-12% रही है। 2021-22 से 2025-26 तक प्रति व्यक्ति आय में लगभग 51% की वृद्धि हुई, जो ₹1.34 लाख से ₹2.02 लाख तक पहुंच गई। यह पहली बार है जब राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय ₹2 लाख के पार गई, जो राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंच रही है (राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय 2025-26 में लगभग ₹2.5-2.7 लाख अनुमानित)।

कॉन्स्टेंट प्राइसेस पर प्रति व्यक्ति आय:

- 2021-22: ₹79,490
- 2022-23: ₹83,561
- 2023-24: ₹88,868
- 2024-25: ₹95,762
- 2025-26: ₹1,03,189 (ग्रोथ: 7.76%)

बढ़ोतरी के प्रमुख कारक

भविष्य में 'विकसित राजस्थान 2047' का लक्ष्य ($4.3 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था) महत्वाकांक्षी है। 2026-27 में जीएसडीपी ₹21.52 लाख करोड़ अनुमानित है। यदि 10%+ ग्रोथ बनी रही, तो 2047 तक लक्ष्य संभव है, लेकिन इसके लिए कृषि में उत्पादकता, स्किल्ड रोजगार और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जरूरी।