Drugs Factory Hub: राजस्थान में एमडी ड्रग्स, यानी मेफेड्रोन (Mephedrone) या MDMA जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की अवैध फैक्टरियां राज्य में तेजी से फैल रही है। ये ड्रग्स न सिर्फ स्वास्थ्य को नष्ट कर रही हैं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर कर रही हैं। पिछले 6 वर्षों में राजस्थान में ऐसे कई नेटवर्क पकड़े गए हैं जहां बड़ी मात्रा में ड्रग्स का उत्पादन और वितरण हो रहा था। 

NCB और राज्य पुलिस की रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में ड्रग्स जब्ती के मामलों में 30-40% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल में राजस्थान में 500 से अधिक ड्रग्स संबंधित गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें से 20% एमडी फैक्टरियों से जुड़ी थीं। यह खतरा न सिर्फ स्थानीय है बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों से जुड़ा है, जो महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश तक फैला हुआ है।

एमडी जैसी सिंथेटिक ड्रग्स अभी बनने लगीं

राजस्थान में सिंथेटिक ड्रग्स जैसे एमडी बनने का चलन राजस्थान में बिल्कुल नया है।  2020 के आसपास, कोविड-19 महामारी के दौरान, पारंपरिक ड्रग्स जैसे अफीम और गांजा की सप्लाई चेन प्रभावित हुई, जिससे सिंथेटिक ड्रग्स की मांग बढ़ी। NCB की 2021 रिपोर्ट में राजस्थान को 'सिंथेटिक ड्रग्स हब' के रूप में चिह्नित किया गया, जहां 2019-20 में 100 किलो से अधिक एमडी जब्त की गई। राज्य के ग्रामीण इलाकों में, जहां बेरोजगारी और गरीबी ज्यादा है, लोग आसान कमाई के लिए इन फैक्टरियों में शामिल हो जाते हैं।

2020-22 के बीच, राजस्थान पुलिस ने 150 से अधिक छापे मारे, जिनमें ज्यादातर अफीम और हेरोइन से जुड़े थे। लेकिन 2023 से एमडी फैक्टरियों में उछाल आया। उदाहरण के लिए, 2023 में जोधपुर जिले में एक छोटी लैब पकड़ी गई, जहां 50 किलो एमडी तैयार थी। यह ट्रेंड 2024-25 में तेज हुआ, जब अंतरराज्यीय नेटवर्क उजागर हुए। NCB के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में राजस्थान से जब्त एमडी की मात्रा 200 किलो से अधिक थी, जो पिछले साल से 50% ज्यादा। ये फैक्टरियां अक्सर रिमोट गांवों, फार्महाउस या स्कूलों के पास छिपी होती हैं, जहां निगरानी कम होती है।

एमडी ड्रग्स के साथ पकड़े गए नेटवर्कों की कहानियां

राजस्थान में एमडी ड्रग्स नेटवर्कों के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन हुए हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को दर्शाते हैं। आइए कुछ प्रमुख मामलों पर नजर डालें, जहां आंकड़े और डिटेल्स स्पष्ट रूप से उपलब्ध हैं।

1. सिरोही जिला बस्ट (नवंबर 2025): NCB और राजस्थान पुलिस ने सिरोही के एक रिमोट गांव में एक क्लैंडेस्टाइन लैब पर छापा मारा। यहां सैकड़ों किलो केमिकल्स जब्त किए गए, जो 100 किलो मेफेड्रोन बनाने के लिए पर्याप्त थे – बाजार मूल्य करीब 40 करोड़ रुपये। मास्टरमाइंड समेत पांच लोग गिरफ्तार हुए। यह नेटवर्क मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक फैला था, जहां एमडी को पार्टी सर्किट में सप्लाई किया जाता था। जांच में पता चला कि लैब 6 महीने से चल रही थी, और इसमें लोकल किसान शामिल थे जो केमिकल्स की सप्लाई करते थे। यह बस्ट 'ऑपरेशन नारकोस' का हिस्सा था, जिसमें कुल 1700+ मामले दर्ज हुए।

2. जोधपुर-पाली ड्रग्स प्लांट (मई 2024): दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जोधपुर और पाली में दो प्लांट पकड़े गए, जहां 200 करोड़ रुपये का एमडी ड्रग्स बरामद हुआ। नेटवर्क पांच राज्यों (राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश) में फैला था। ऑर्डर 40 करोड़ से कम के नहीं लिए जाते थे। छापे में 10 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें केमिस्ट और ट्रांसपोर्टर शामिल थे। यह नेटवर्क चिकन फीड की आड़ में ड्रग्स ट्रांसपोर्ट करता था, जैसा कि DRI के एक अन्य बस्ट में देखा गया जहां 270 किलो मेफेड्रोन (81 करोड़ मूल्य) जब्त हुई।

3. 'ब्रेकिंग बैड' स्टाइल टीचर्स नेटवर्क (जुलाई 2025): जोधपुर में दो टीचर्स – एक सरकारी स्कूल का साइंस टीचर और एक पूर्व फिजिक्स टीचर – को 15 करोड़ रुपये के एमडी ड्रग्स बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उनकी लैब घरेलू थी, लेकिन प्रोफेशनल केमिकल्स इस्तेमाल करते थे। यह नेटवर्क लोकल युवाओं को टारगेट करता था, और जांच में 20 से अधिक सप्लायर्स उजागर हुए। यह मामला दिखाता है कि कैसे शिक्षित लोग इस धंधे में शामिल हो रहे हैं।

4. प्रतापगढ़ एमडी फैक्ट्री (फरवरी 2026): प्रतापगढ़ पुलिस ने 'ऑपरेशन चक्रव्यूह' के तहत वॉटर वर्क्स रोड पर एक फैक्ट्री पर रेड की। 106 ग्राम एमडी, 114 किलो लिक्विड केमिकल्स जब्त। तीन आरोपी – शाकीर खान, रोहित मोगरा, शंकरलाल मीणा – गिरफ्तार। मुख्य आरोपी यश उर्फ श्रेयांश और धर्मचंद फरार हैं, जिन पर 25 हजार का इनाम है। यह नेटवर्क मध्य प्रदेश से जुड़ा था, जहां राजगढ़ में समान फैक्ट्री पकड़ी गई।

5. अंतरराज्यीय सिंडिकेट बस्ट (जुलाई 2025): NCB, राजस्थान और महाराष्ट्र पुलिस ने एक इंटर-स्टेट सिंडिकेट को तोड़ा, जिसमें केमिकल्स और इक्विपमेंट जब्त किए गए। कई गिरफ्तारियां हुईं, और यह नेटवर्क गुजरात से जुड़ा था, जहां सूरत में 51 करोड़ की एमडी जब्त हुई।

ये मामले कुल मिलाकर 500 करोड़ से अधिक की जब्ती दर्शाते हैं। RPF इंडिया की 2024-25 रिपोर्ट में राजस्थान से जुड़े 1700+ मामलों में 173 करोड़ की ड्रग्स जब्ती का जिक्र है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2020-26 में राजस्थान में एमडी जब्ती 100 किलो से बढ़कर 500 किलो+ हो गई, वार्षिक ग्रोथ 25%।

क्यों राजस्थान बन रहा है हब?

राजस्थान में एमडी फैक्टरियों का बढ़ना कई कारकों से जुड़ा है। पहला, बॉर्डर स्टेट होना – पाकिस्तान से केमिकल्स की तस्करी आसान है। दूसरा, रिमोट एरियाज जैसे सिरोही, प्रतापगढ़ जहां निगरानी कम। तीसरा, बेरोजगारी – युवा आसान कमाई के लिए शामिल होते हैं। चौथा, सिंथेटिक ड्रग्स की आसान निर्माण प्रक्रिया; सस्ते केमिकल्स जैसे एफेड्रिन से एमडी बनाया जा सकता है।

NCB रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 70% नेटवर्क अंतरराज्यीय हैं, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से ऑर्डर लेते हैं। समाज में पार्टी कल्चर और तनाव के कारण मांग बढ़ी है। 2025 में राजस्थान में 10,000 से अधिक युवा ड्रग्स एडिक्शन सेंटर्स में भर्ती हुए।