Bangar Hospital News: पाली से जोधपुर रेफर किए गए मरीज की एंबुलेंस में तड़प-तड़प कर मौत हो गई। परिजन उसी एंबुलेंस में बॉडी को लेकर वापस बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचे और मॉर्च्यूरी के बाहर धरने पर बैठ गए। परिजनों का आरोप है कि ड्राइवर की गलती के कारण बेटे की जान चली गई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बांगड़ हॉस्पिटल से रविवार को ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज को 108 एंबुलेंस से जोधपुर रेफर किया गया। 20 किलोमीटर दूर जाते ही एंबुलेंस में रखे सिलेंडर से ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई। ड्राइवर ने दूसरा सिलेंडर मंगवाया, लेकिन तब तक मरीज अपने भाई की गोद में तड़प-तड़पकर दम तोड़ चुका था।
ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज को लेकर जोधपुर रवाना हुए थे
वहीं मृतक के बड़े भाई देवाराम ने बताया कि सावन की हालत गंभीर होने पर उसे आज जोधपुर MDM हॉस्पिटल रेफर किया गया। हमनें फोन कर 108 एंबुलेंस बुलाई, जिसमें ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज को लेकर जोधपुर रवाना हुए। बीच रास्ते में भाई की तबीयत बिगड़ने लगी, देखा तो ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो गई थी। एंबुलेंस ड्राइवर को बोला तो उसने कहा कि दूसरा सिलेंडर मंगवा लिया है, लेकिन ओम बन्ना धार्मिक स्थल के निकट पहुंचे ही थे कि भाई की सांसें थम गईं। उसने मेरी गोदी में ही दम तोड़ दिया।
ड्राइवर पर लापरवाही का लगा आरोप
हमने एंबुलेंस ड्राइवर को बताया कि भाई की मौत हो गई है। अब सिलेंडर बदलने से कोई मतलब नहीं। रोते हुए भाई की बॉडी वापस बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। देवाराम का आरोप है कि एंबुलेंस ड्राइवर की लापरवाही से उसके भाई की जान गई है। मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर मृतक के परिजन बांगड़ हॉस्पिटल की मॉर्च्यूरी के बाहर धरने पर बैठ गए। मृतक की मां लाली देवी का कहना है कि उनका बेटा हॉस्पिटल में सही होने आया था, लेकिन ड्राइवर की लापरवाही ने उसकी जान ले ली।
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही
मृतक के भाई देवाराम ने बताया कि करीब 6 महीने पहले उसके भाई की दोनों किडनियों में समस्या हो गई। अब तक सिर्फ 10 बार उसका डायलिसिस हुआ था। सप्ताह में दो बार उसे डायलिसिस करवाने बांगड़ हॉस्पिटल लाते थे। चार दिन पहले 7 मई को तबीयत बिगड़ने पर उसे बांगड़ हॉस्पिटल में भर्ती करवाया था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।