Bharatpur News: राजस्थान के भरतपुर जिले में विकास की गति खूब तेज है, लेकिन अब इस विकास की गति पर विराम लग सकती है। क्योंकि 2025 के दिसंबर में सरकार ने भरतपुर जिले को बड़ी सौगात दी थी और यह सौगात थी कि ऊंचा नगला से सारस चौराहे होते हुए शीशम तिराहे तक सिक्स लेन फ्लाईओवर का निर्माण होना था, जिसमें बड़ा अड़चन सामने आ गया है। इस निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट सरकार की ओर से सैंक्शन किया गया था, लेकिन अब इस निर्माण में बाधा उत्पन्न हो गया है।

फ्लाईओवर बनने को लेकर क्यों आई अड़चन 

 बताया जा रहा है कि इस फ्लाईओवर को बनाने के लिए इस लेने में आने वाले करीब 1,900 पेड़ काटने होंगे, लेकिन 18,000 से अधिक पेड़ लगाने भी होंगे। भरतपुर जिले के कई हिस्से ताज ट्रेपीजियम जोन में आता है और इसी को लेकर यह सख्त कानून है कि अगर इस क्षेत्र में 20 पेड़ काटे जाते हैं, तो उसे 10 गुना यानी 200 पर लगाने होंगे। यहां दिक्कत यह है कि 1,900 पेड़ इस लेने से कट तो दिए जाएंगे, लेकिन ताज ट्रेपीजियम जोन में 18 हजार पेड़ लगाने के लिए कहीं जगह ही नहीं है। यही कारण है कि फ्लाईओवर निर्माण संकट में आ गया है। 

NHAI ने इसको लेकर क्या कहा

इस फ्लाईओवर का निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के द्वारा किया जाएगा। उनका कहना है कि ताज ट्रेपीजियम जोन में 19,000 पेड़ लगाने के लिए जगह नहीं है, लेकिन हम इस जॉन के आसपास वाले क्षेत्र में 19,000 पेड़ लगाने के लिए तैयार हैं। अभी तक इस पर फैसला नहीं आया है। अगर पर्यावरण विभाग इस पर आदेश जारी कर देता है, तभी इस पर मंजूरी बनेगी। दूसरी तरफ आपको बता दें कि फ्लाईओवर बनने के लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है, अब देखने वाली बात है कि क्या इसमें कोई बाधा उत्पन्न होती है या फिर इसे सुचारु रूप से बनाया जाएगा। 

क्या होता है ताज ट्रेपीजियम जोन 

आखरी में आपको यह भी बता दें ताज ट्रेपीजियम जोन हम ऐसे जोन को कहते हैं, जो आगरा में स्थित विश्व धरोहर ताजमहल को संरक्षित करने के लिए 10,400 वर्ग किलोमीटर के एरिया में फैला हुआ है। इस एरिया में आने वाले वृक्षों को काटने के नियम खूब सख्त है। क्योंकि अगर पर्यावरण खराब हुआ तो इसका सीधा असर ताजमहल पर देखने को मिलेगा और भरतपुर के कुछ हिस्से भी इस ताज ट्रेपीजियम जोन में आता है, जो कि ताजमहल को संरक्षित करने के लिए पर्यावरण विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है।