अगर आप रात में सोते समय कमरे की लाइट, टीवी या बाहर की स्ट्रीट लाइट की रोशनी में सोते हैं, तो इस आदत को बदलना बेहतर हो सकता है। हाल ही में हुई स्टडी में सोते समय ज्यादा रोशनी से दिल की बनावट व कामकाज में कुछ बदलाव देखे गए हैं। लंबे फॉलो-अप में ज्यादा नाइटटाइम लाइट एक्सपोजर वाले लोगों में कुछ हृदय रोगों का जोखिम ज्यादा था।
रिसर्च में दिल की बनावट और कार्यक्षमता में बदलाव दिखे
एक्सपर्ट के मुताबिक, रात में रोशनी में रहने वाले लोगों के दिल की बनावट व काम करने के तरीके में बदलाव दिखे। मांसपेशियों की दीवारें मोटी व खून पंप करने की क्षमता थोड़ी कम थी। ये बदलाव अभी दिल की बीमारी नहीं हैं, लेकिन आगे चलकर बीमारी के खतरे से जुड़े हो सकते हैं।
लम्बे समय में हार्ट डिजीज का भी जोखिम भी बढ़ सकता है
शोधकर्ताओं ने लंबे समय तक लोगों का फॉलो-अप किया। इसमें रात की रोशनी व हार्ट डिजीज के बीच संबंध मिला। ऐसे लोगों में हार्ट फेल्योर का जोखिम 29%, हार्ट अटैक का 24%, स्ट्रोक का 33% और हार्ट डिजीज से मौत का जोखिम 26% ज्यादा था। एट्रियल फिब्रिलेशन का जोखिम भी 15% ज्यादा पाया गया।
सोते समय कमरे में रखें अंधेरा, ये आसान उपाय अपनाएं
रात में सोते समय कमरे की रोशनी जितनी कम हो, उतना बेहतर होता है। इसके लिए सोते समय हमेशा कमरे की लाइट बंद रखें और टीवी या फोन की तेज रोशनी से बचें। टीवी या दूसरी स्क्रीन से आने वाली रोशनी भी रात के एक्सपोजर को बढ़ा सकती है। साथ ही अगर बाहर की स्ट्रीट लाइट कमरे में आती है तो पर्दे लगाएं।