Historic Palaces of Rajasthan: राजस्थान अपनी संस्कृति के साथ-साथ ऐतिहासिक किलों और भव्य महलों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। राजस्थान में आपको कई आलीशान महल और किले देखने को मिलते हैं। इनकी बनावट हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। अक्सर जब भी आप पुराने महलों की दीवारों और कमरों को देखते हैं, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी कि इनमें बेहद बारीक नक्काशी और छोटे-छोटे झरोखे बनाए गए हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर राजा-महाराजा अपने महलों में ये झरोखे क्यों बनवाते थे। आज हम आपको इस लेख में बताएंगे कि इन झरोखों के पीछे क्या खास वजह थी। आइए जानते हैं।
आपको बता दें कि राजा-महाराजाओं के दौर में आज की तरह बिजली, लाइट और एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। ऐसे में गर्मी से बचने और महलों को अंदर से ठंडा रखने के लिए छोटे-छोटे झरोखे बनवाए जाते थे। इन झरोखों की मदद से बाहर की ठंडी हवा महल के अंदर आती थी और अंदर की गर्म हवा बाहर निकल जाती थी। झरोखों से छनकर आने वाली हवा महल के अंदर तापमान को सामान्य बनाए रखने में भी मदद करती थी।
झरोखे बनाने की दूसरी बड़ी वजह महल की सुरक्षा थी। ये झरोखे आकार में छोटे और बारीक जालीदार डिजाइन वाले होते थे, जिससे झरोखे के पीछे खड़ा सैनिक या राजा बाहर होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रख सकता था। वहीं, बाहर खड़े किसी व्यक्ति या दुश्मन को यह पता नहीं चल पाता था कि झरोखे के पीछे कौन खड़ा है और महल के अंदर क्या हो रहा है।
इतना ही नहीं, उस समय राजघराने की महिलाएं और रानियां भी सार्वजनिक कार्यक्रमों, जुलूसों और समारोहों को इन झरोखों से ही देखा करती थीं। इससे वे बिना किसी की नजर में आए बाहर की गतिविधियों का आनंद ले सकती थीं। यही कारण है कि किलों और महलों में दिखाई देने वाले ये खूबसूरत झरोखे केवल उनकी सुंदरता बढ़ाने के लिए नहीं बनाए जाते थे, बल्कि इनके पीछे पूर्वजों की अद्भुत वास्तुकला, वैज्ञानिक सोच और सुरक्षा रणनीति भी छिपी हुई थी।