Rajasthan Rail Projects: उत्तर पश्चिम रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 में राजस्थान और सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 13 बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। करीब 21 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले इन प्रोजेक्ट्स की डीपीआर इसी साल रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी, जिससे उनकी मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। बड़े प्रोजेक्ट्स को बाद में नीति आयोग को भी भेजा जाएगा, जबकि कुछ योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से स्वीकृति दिलाने की तैयारी है।
सबसे अहम जयपुर-फुलेरा तीसरी लाइन है, जो प्रदेश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर पर दबाव कम करेगी। अभी इस सेक्शन पर ट्रैफिक अधिक होने से ट्रेनों को क्रॉसिंग और ओवरटेक में देरी - होती है। तीसरी लाइन बनने से एक साथ ज्यादा ट्रेनें चल सकेंगी, - जिससे जयपुर-अजमेर और जयपुर-जोधपुर रूट पर संचालन आसान होगा और एक्सप्रेस ट्रेनों की गति में सुधार आएगा।
रिफाइनरी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अनूपगढ़-खाजूवाला-जैसलमेर (340 किमी, 7150 करोड़) लाइन सीमावर्ती तीन जिलों को जोड़ेगी और सेना की आवाजाही को सुगम बनाएगी। वहीं जैसलमेर-बाड़मेर-भीलड़ी (380 किमी, 10450 करोड़) प्रोजेक्ट पश्चिमी राजस्थान को गुजरात के बंदरगाहों से जोड़ा जाएगा। ऐसे में इस कदम से रिफाइनरी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा
आपको बताते चलें कि फलौदी (शैतान सिंह नगर)-नागौर (148 किमी, 2540 करोड़) लाइन से औद्योगिक क्षेत्रों में परिवहन आसान हो जाएगा। वहीं देवगढ़ मदारिया-मारवाड़ (करीब 72 किमी) लाइन मेवाड़-मारवाड़ दूरी कम होगी और नाथद्वारा पर्यटन को लाभ भी मिलेगा। खाटूश्यामजी-सालासर-सुजानगढ़ (126.89 किमी) लाइन धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि सभी प्रोजेक्ट्स की डीपीआर रेलवे बोर्ड को भेजने के बाद मंजूरी मिलने पर प्रदेश में रेल नेटवर्क, कनेक्टिविटी और संचालन क्षमता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ उद्योग और पर्यटन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलेगा।