Rajasthan Funeral Law: राजस्थान में मृत शरीर सम्मान कानून के नियम लागू कर दिए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत मृतक के परिजनों को 24 घंटे के भीतर अंतिम संस्कार करना अनिवार्य होगा। अगर किसी शव का उपयोग धरना-प्रदर्शन या विरोध के लिए किए जाने की आशंका होती है, तो पुलिस उसे अपने कब्जे में ले सकेगी। वहीं परिजन सहमत नहीं होने पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट लोक प्राधिकारी के माध्यम से अंतिम संस्कार कराएंगे।

गुमशुदा लोगों के डीएनए से मिलान किया जाएगा

पुलिस मुख्यालय में रेंज स्तर की बैठक में डीजीपी राजीव शर्मा ने सभी जिला एसपी को नियमों की बुकलेट देकर सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने राजस्थान मृत शरीर का सम्मान अधिनियम 2023 के साथ इसके विस्तृत नियम 2025 लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य शवों की गरिमा और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लावारिस शवों की पहचान और सम्मानजनक निस्तारण के लिए उनका डीएनए डेटा बैंक तैयार किया जाएगा। इसे गुमशुदा लोगों के डीएनए से मिलान किया जाएगा। अस्पतालों में ऐसे शवों को सुरक्षित रखने के लिए डीप फ्रीज की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी।

दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान

कानून के तहत कोई भी व्यक्ति शव का उपयोग विरोध, आंदोलन या दबाव बनाने के लिए नहीं कर सकेगा। ऐसा करने या शव लेने से इनकार करने पर दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। परिवार के सदस्यों को समय पर अंतिम संस्कार करना होगा। यदि पुलिस को आशंका हो कि शव का दुरुपयोग हो सकता है, तो वह उसे कब्जे में ले सकती है।

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पोस्टमार्टम कक्ष को सार्वजनिक दृष्टि से बचाने के लिए पर्दे या स्क्रीन अनिवार्य किए गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद शवों को विशेष बॉडी बैग में ढककर सम्मानजनक तरीके से ले जाया जाएगा। आपदा या दुर्घटना में अधिक मृतकों की स्थिति में परिजनों की सहायता और शिकायतों के लिए हेल्पलाइन और वेब पोर्टल शुरू किया जाएगा।