Rajasthan Health News: कोटा के सरकारी हॉस्पिटलों में अब गर्मवती महिलाओं को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलेगा। दरअसल, अब हर गर्भवती महिला को एक पर्सनल गाइड यानी प्रसव सखी साथ मिलेगी। पिंक एप्रन पहले ये प्रशिक्षित सखियां (स्वास्थ्यकर्मी) हॉस्पिटल में कदम रखते ही गर्भवती को अपनी देखरेख में ले लेंगी। सुरक्षित डिलीवरी होने और घर लौटने तक हर मदद करेंगी।
सीएमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर ने बताया कि हॉस्पिटलों में राउंड-द-क्लॉक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क काम करेंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हाई-रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी करना और मातृ-शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाना है। अक्सर देखने में आता है कि ग्रामीण इलाकों से आने वाली गर्भवती महिलाएं या उनके परिजन हॉस्पिटल के अलग-अलग कमरों, जांच केंद्रों और कागजी प्रक्रियाओं के फेर में परेशान हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि हॉस्पिटलों में राउंड-द-क्लॉक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क काम करेंगी।
हेल्प डेस्क पर पिंक एप्रन पहने एएनएम या प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ तैनात रहेगा, जिससे मरीज आसानी से उन्हें पहचान सकें। प्रसूता को तुरंत लेबर रूम पहुंचाना, आवश्यक ब्लड यूरिन की जांच और डॉक्टरों से तालमेल बिठाना प्रसव सखी की जिम्मेदारी होगी। सीएमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर ने बताया कि यह सेवा चरणबद्ध तरीके से मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हॉस्पिटलों, जिला हॉस्पिटलों और ज्यादा लोड वाली पहली रेफरल इकाइयों (जहां से महिलाओं को रेफर किया जाता है) में लागू की जा रही है।
कई बार सही समय पर सही मार्गदर्शन न मिलने से हाई रिस्क गर्भवतियों की स्थिति बिगड़ जाती है। प्रसव सखी यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी महिला को इलाज में एक मिनट की भी देरी न हो। व्यवस्था को इस तरह डिजाइन किया गया है कि 104 जननी एक्सप्रेस के जरिए घर से हॉस्पिटल पहुंचने से लेकर हॉस्पिटलों से छुटटी तक का सफर बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके। प्रसव सखी न केवल हॉस्पिटलों में मदद करेंगी, बल्कि जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने और प्रसव के बाद नवजात की देखभाल संबंधी जरूरी गाइडेंस भी देंगी।