Water Supply Issues: प्रदेश में तापमान बढ़ने के साथ ही दूषित पानी सप्लाई की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। सीवर लाइन जाम होने और बूस्टर लगाने की वजह से जर्जर व पुरानी पाइपलाइनों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। दूषित पानी की सप्लाई होने की नी वजह से प्रदेश के कई इलाकों से । लोगों के बीमार होने की शिकायतें भी आ रही है। ऐसे में अब दूषित पानी की सप्लाई रोकने के लिए वीं जलदाय विभाग के इंजीनियरों को ए नियमित सैंपल लेने होंगे, ताकि समस्या का तत्काल समाधान किया जा सके। इंजीनियरों को सैंपल की न रिपोर्ट विभाग के आला अधिकारियों ल को भी भेजना होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने पिछले दिनों प्रदेश में पेयजल सप्लाई सिस्टम की सख्त मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए थे।

विभागीय लापरवाही से बढ़ा संकट

विभाग की ओर से जेईएन से लेकर एक्सईएन तक हर महीने पानी के सैंपल लेने की लक्ष्य निर्धारित कर रखे हैं, लेकिन उसकी पालना नहीं हो रही है। पेयजल सप्लाई के दौरान क्लोरीन व जीवाणु परीक्षण के सैंपल की जांच नहीं होने की वजह से दूषित पानी सप्लाई हो जाता है। शहर में स्वच्छ पेयजल सप्लाई की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी पर है। 

सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश के बावजूद हालात खराब

दूषित पानी की आपूर्ति, लीकेज या खराब गुणवत्ता की शिकायत के लिए लोग अपने स्थानीय जलदाय विभाग कार्यालय या राजस्थान संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं होने से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल शुद्धता की जांच के लिए विभाग में लैब मौजूद है, लेकिन इसकी जानकारी आम लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही है।