राजस्थान डेस्क : बयाना, जिसे प्राचीन काल में ब्रह्मावाद  के नाम से जाना जाता था, कभी जैन और वैष्णव धर्म का एक बड़ा और समृद्ध केंद्र रहा है। यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध था। इतिहासकारों  के अनुसार यहां दूर-दूर से लोग पूजा-अर्चना, व्यापार और मेलों में भाग लेने के लिए आते थे। बयाना में आज भी ऐसे कई प्रमाण मौजूद है जो इसके गौरवशाली अतीत की याद दिलाते है। यहां प्राचीन मंदिरों के अवशेष, बावड़ियां और ऐतिहासिक इमारतें उस समय की समृद्ध निर्माण कला को दर्शाती है।

जैन और वैष्णव समुदायों का यहां गहरा प्रभाव रहा है  जिसका उल्लेख पुराने ग्रंथों और स्थानीय परंपराओं में भी मिलता है। मुग़ल काल में बयाना का महत्व और बढ़ गया। इसी दौरान जोधाबाई द्वारा यहाँ भव्य और मजबूत बावड़ी का निर्माण कराया गया था। यह बावड़ी न केवल जल संरक्षण का महत्वपूर्ण साधन थी, बल्कि इसकी सुंदर बनावट भी लोगों को आकर्षित करती थी। आज भी यह बावड़ी बयाना की ऐतिहासिक पहचान का एक प्रमुख प्रतीक मानी जाती है।

 इतिहास में ये भी दर्ज है की समय बयाना में बड़े मेलो का आयोजन होता था, जिनमे आसपास के क्षेत्रों से लोग बड़ी  संख्या में आते थे।  हालांकि, सुल्तान इब्राहिम लोदी के शासनकाल में इन मेलों पर रोक लगा दी गई थी, जिससे सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा। इसके बावजूद भी  बयाना अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को आज तक संभाले हुए है। यहां मौजूद किले, बावड़ियां, मंदिर और अन्य अवशेष इस बात के साक्षी हैं कि यह नगर कभी एक समृद्ध और महत्वपूर्ण केंद्र रहा था। आज बयाना इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक खास स्थान बना हुआ है, जहां हर पत्थर अतीत की कहानी कहता है।