Maharudra Shaktipeeth Jaipur: भारतीय इतिहास में प्रथम बार जयपुर शहर के आमेर की पावन भूमि मेहन्दी का बास में भारत का प्रथम महारूद्र शक्तिपीठ की ऐतिहासिक स्थापना परम पूज्य गलतापीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित श्री स्वामी सम्पत कुमार अवधेशाचार्य जी महाराज के परम सानिध्य में प्रतिमाएं स्थापित होगी।

शिवमहापुराण कथा व भव्य कलश यात्रा

Maharudra Shaktipeeth Jaipur

महारुद्र शक्ति पीठ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं शिवमहापुराण कथा व भव्य कलश यात्रा की शुरुआत 30 जनवरी 2026 से होगी और इसकी समाप्ति 7 फरवरी 2026 को होगी। कलश यात्रा 30 जनवरी को सुबह 9 बजे श्री शिला माता मंदिर से रवाना होकर महारुद्र शक्तिपीठ मंदिर मेहंदी के बास के लिए प्रस्थान करेगी। 6 फरवरी को भगवान भोलेनाथ का बारात धूमधाम से निकला जाएगा। और इस बीच शिव कथा का भी आयोजन करवाया जाएगा। कथा कहने के लिए परम श्रेद्धय कथा वाचक : श्री प. शिव गुरू उज्जैन और चक्रेश्वर शिलिंग का प्राण प्रतिष्ठा आचार्य श्री अवधेश जी शास्त्री करेंगे।

देश की पहली शक्तिपीठ

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आपको बता दें कि महारुद्र शक्तिपीठ मंदिर के संयोजक मनीष सोनी ने बताया कि यह आयोजन संपूर्ण सनातन समाज की सामूहिक साधना और आध्यात्मिक जागरण का महायज्ञ है। दावा यह है कि देश की पहली शक्तिपीठ होगी। शक्तिपीठ में अष्ट भैरव की स्थापना की जाएगी, जो आठ दिशाओं की रक्षा करने के साथ ही नकारात्मकता को दूर करेंगे। ये अष्ट भैरव का नाम है आप देख सकते हैं 

अष्ट भैरव और उनकी प्रकृति

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असितांग भैरव (पूर्व): ज्ञान, जागृति, विवेक
रुरु भैरव (दक्षिण-पूर्व) : रोग नाश, साहस,
चण्ड भैरव (दक्षिण) : न्याय, दुष्ट-विनाश
क्रोध भैरव (दक्षिण-पश्चिम) : क्रोध-संयम, शत्रु-शमन
उन्मत्त भैरव (पश्चिम) : भय- नाश, तांत्रिक रक्षा
कपाल भैरव (उत्तर-पश्चिम) : कर्मबंधन से मुक्ति
भीषण भैरव (उत्तर) : आध्यात्मिक शक्ति, तप
संहार भैरव (उत्तर-पूर्वी : अज्ञान, नशा, संकल्प-सिद्धि, 
मां काली - समय, भय और मृत्यु पर विजय
लिंग भैरवी - ऊर्जा स्वरूपा महाशक्ति

नजर आएंगे लिंग भैरवी चक्रेश्वर महालिंग

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वही जगतगुरु बसंत विजय आनंद गिरी कहते हैं कि शक्तिपीठ में सात-चक्र शिवलिंग कुंडलिनी जागरण का केंद्र स्थापित किया जाएगा। लिंग भैरवी चक्रेश्वर महालिंग यहां नजर आएगा। 30 जनवरी से सात फरवरी तक नौ दिवसीय कार्यक्रम होंगे। इस कार्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा भक्त शामिल हो और इस यज्ञ को पूर्ण करें।

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